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CBSE की नई थ्री लैंग्वेज नीति: 10वीं के छात्रों को राहत

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नई थ्री लैंग्वेज नीति के तहत स्कूलों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस नीति के अनुसार, वर्तमान 10वीं कक्षा के छात्रों पर यह नियम लागू नहीं होगा, जिससे उन्हें बोर्ड परीक्षा की तैयारी में राहत मिलेगी। कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को भी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। जानें इस नई नीति के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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CBSE की नई गाइडलाइन


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लागू करने के लिए नई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अच्छी बात यह है कि यह नया नियम वर्तमान 10वीं कक्षा के छात्रों पर लागू नहीं होगा, जिससे लाखों विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी में राहत मिली है।


छात्रों के लिए नई भाषा नीति

CBSE के अनुसार, कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को 10वीं में पहुंचने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। यदि किसी छात्र ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, तो उसे एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी, लेकिन इस भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।


भाषा सीखने में सहूलियत

बोर्ड ने यह भी बताया कि नई भाषा नीति को छात्रों के लिए सरल और आकर्षक बनाया जाएगा। छात्रों को उनकी कक्षा के अनुसार अध्ययन सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि भाषा सीखने में कोई कठिनाई न हो।


मूल्यांकन की प्रक्रिया

CBSE ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 9वीं कक्षा के छात्रों की तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होगा। जब ये छात्र 2027-28 में 10वीं कक्षा में जाएंगे, तब तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।


भाषाओं का चयन

वर्तमान में 7वीं और 8वीं में पढ़ रहे छात्रों को 9वीं और 10वीं में तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। जिन छात्रों ने पहले से दो गैर-मातृभाषाएं चुनी हैं, उन्हें केवल एक भारतीय भाषा जोड़नी होगी और 10वीं तक उसी का अध्ययन करना होगा। इस भाषा का मूल्यांकन भी केवल स्कूल के आंतरिक आकलन पर आधारित होगा.


विशेष आवश्यकताओं के छात्रों के लिए

CBSE ने यह भी बताया कि NCERT सभी 22 निर्धारित भारतीय भाषाओं के लिए कक्षा 6 की विशेष किताबें तैयार कर रहा है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पहले की तरह सभी रियायतें मिलती रहेंगी। इसके अलावा, विदेशों में स्थित CBSE स्कूलों और विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में भारतीय मातृभाषा पढ़ने से छूट दी गई है.