CRPF जवानों में मानसिक तनाव: पांच वर्षों में 281 आत्महत्याएं
सीआरपीएफ जवानों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं
नई दिल्ली: देश की आंतरिक सुरक्षा का दायित्व निभाने वाले सबसे बड़े अर्धसैनिक बल, सीआरपीएफ (CRPF), के जवानों के लिए एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है। आतंकवादियों और नक्सलियों से मुकाबला करने वाले ये बहादुर जवान अब मानसिक तनाव और व्यक्तिगत समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में जवानों द्वारा आत्महत्या के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में आत्महत्या के मामले अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन में चिंता का माहौल है।
ड्यूटी के दौरान आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी हैं
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 59 सीआरपीएफ जवानों ने आत्महत्या की, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक जवान सिपाही (Constabulary) रैंक के थे। आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच 262 आत्महत्या के मामलों में से 202 (लगभग 77 प्रतिशत) जवानों ने अपनी जान तब ली जब वे ड्यूटी पर थे। शेष घटनाएं छुट्टी के दौरान हुईं।
पारिवारिक तनाव और नौकरी का दबाव
हालांकि इस गंभीर मुद्दे पर बल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कुछ सीआरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि जवानों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। जांच में यह सामने आया है कि आत्महत्या के अधिकांश मामलों के पीछे पारिवारिक विवाद और घरेलू समस्याएं मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, नौकरी की कठिन दिनचर्या और तनावपूर्ण परिस्थितियों ने जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इस बल में लगभग 3.25 लाख जवान हैं, जिनमें से 95 से 97 प्रतिशत हमेशा मोर्चे पर तैनात रहते हैं।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़े
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति की गंभीरता स्पष्ट होती है। अधिकारियों के अनुसार, 2021 में 57, 2022 में 43, 2023 में 57 और 2024 में 46 जवानों ने आत्महत्या की। जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 59 हो गया। जुलाई 2026 तक के 19 मामलों को जोड़ने पर, कुल 281 जवानों ने आत्महत्या की है। इनमें से 237 जवान अराजपत्रित (Non-gazetted) रैंक के थे, जो निचले स्तर पर काम करने वाले जवानों पर पड़ने वाले दबाव को दर्शाता है।
