भारत की आर्थिक जनगणना: घरों से चलने वाले प्रतिष्ठानों की बढ़ती संख्या
आर्थिक जनगणना का महत्व
भारत में जनगणना के दौरान न केवल जनसंख्या, बल्कि आर्थिक गतिविधियों की भी गिनती की जाती है। आर्थिक जनगणना में उन प्रतिष्ठानों की संख्या शामिल होती है, जिनसे लोग अपनी आय अर्जित करते हैं। इसमें घरेलू दुकानों, उद्योगों और छोटे व्यवसायों की गणना की जाती है। छठी आर्थिक जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, 36 प्रतिशत प्रतिष्ठान घरों से संचालित होते हैं। इसके अलावा, 86 प्रतिशत लोग इन प्रतिष्ठानों के लिए आवश्यक पूंजी अपने घर के फंड, बचत या उधारी से जुटाते हैं.
जनगणना की प्रक्रिया
इस जनगणना का सर्वेक्षण जनवरी 2013 से अप्रैल 2014 के बीच किया गया था। प्रारंभिक रिपोर्ट अगस्त 2014 में जारी की गई थी, जबकि विस्तृत रिपोर्ट हाल ही में सामने आई है। इस बीच, सातवीं आर्थिक जनगणना भी संपन्न हो चुकी है और जून 2026 से आठवीं आर्थिक जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
आर्थिक जनगणना के आंकड़े
छठी आर्थिक जनगणना के अनुसार, देश में कुल 5.85 करोड़ प्रतिष्ठान कार्यरत थे। इनमें से 3.48 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में और 2.37 करोड़ शहरी क्षेत्रों में स्थित थे। 77.6 प्रतिशत प्रतिष्ठान गैर-कृषि कार्यों से संबंधित थे, जबकि 1.32 करोड़ प्रतिष्ठान कृषि से जुड़े थे, जिसमें खेती, कटाई और वृक्षारोपण शामिल हैं.
प्रतिष्ठानों की वृद्धि
2005 में हुई पिछली आर्थिक जनगणना की तुलना में, इस बार प्रतिष्ठानों की संख्या में 41.79 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पहले कुल प्रतिष्ठानों की संख्या 4.12 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 5.85 करोड़ हो गई है। इनमें से 96 प्रतिशत निजी प्रतिष्ठान हैं, जबकि केवल 3.6 प्रतिशत सरकारी या सरकारी कंपनियों के अधीन हैं.
प्रतिष्ठानों का संचालन
आर्थिक जनगणना के अनुसार, 36.19 प्रतिशत प्रतिष्ठान घर से संचालित होते हैं, जिनमें छोटी दुकानें और कुटीर उद्योग शामिल हैं। 18.44 प्रतिशत प्रतिष्ठान ऐसे हैं जो घर से बाहर चल रहे हैं, लेकिन उनकी कोई निश्चित जगह नहीं है। बाकी 45.37 प्रतिशत प्रतिष्ठान निश्चित दुकानों या स्थानों से संचालित होते हैं.
पूंजी का स्रोत
आर्थिक जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि अधिकांश लोग अपने प्रतिष्ठानों के लिए पूंजी अपने घर से ही जुटाते हैं। 85.88 प्रतिशत प्रतिष्ठानों में स्व-पूंजी का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, 6.78 प्रतिशत को दान या अन्य एजेंसियों से धन मिला, जबकि 3.81 प्रतिशत ने उधारी ली। सरकारी एजेंसियों से केवल 1.19 प्रतिशत को सहायता मिली और बैंकों से भी केवल 1.19 प्रतिशत को लोन प्राप्त हुआ.
