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हिंडन एयरपोर्ट की उड़ानों में कमी: यात्रियों की संख्या में गिरावट

हिंडन एयरपोर्ट पर उड़ानों की संख्या में कमी और यात्रियों की घटती संख्या ने चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में UDAAN योजना के तहत शुरू किए गए रूटों में से आधे से अधिक बंद हो चुके हैं। जानें इस स्थिति का क्या असर पड़ा है और क्या सरकार इस पर कोई कदम उठाएगी।
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हिंडन एयरपोर्ट की स्थिति

पिछले कुछ वर्षों में, नरेंद्र मोदी की सरकार ने हवाई यात्रा को सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नए एयरपोर्ट का निर्माण किया गया है और छोटे शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ा गया है। फिर भी, कई एयरपोर्ट खाली पड़े हैं, जिसमें गाजियाबाद का हिंडन एयरपोर्ट भी शामिल है। एक साल पहले यहां से कमर्शियल उड़ानें शुरू हुई थीं, लेकिन अब 9 शहरों के लिए उड़ानें बंद हो चुकी हैं। इसके अलावा, फ्लाइट और यात्रियों की संख्या में भी कमी आई है, जिससे दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर लोड कम करने की योजना को झटका लगा है.


UDAAN योजना के तहत रूटों की स्थिति

हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, UDAAN योजना के तहत कुल 679 रूट शुरू किए गए थे, लेकिन अब केवल 348 रूट ही सक्रिय हैं। इसका मतलब है कि 348 रूट पर उड़ानें बंद हो चुकी हैं। हिंडन एयरपोर्ट पर भी यही स्थिति है, जहां अब हर हफ्ते केवल 98 उड़ानें संचालित हो रही हैं, यानी प्रतिदिन लगभग 14 उड़ानें.


सांसद का सवाल और मंत्रालय का जवाब

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने हाल ही में संसद में इस मुद्दे पर सवाल उठाया था। सिविल एविएशन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने इस पर लिखित जवाब दिया, जिसमें पूछा गया था कि क्या जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद हिंडन एयरपोर्ट से उड़ानें कम की जा रही हैं। हालांकि, इस सवाल का स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया.


यात्री संख्या में कमी

मार्च 2025 में जब हिंडन एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू हुईं, तो पहले महीने में केवल 504 उड़ानें हुईं और 43,250 यात्रियों ने यात्रा की। जुलाई 2025 में उड़ानों की संख्या बढ़कर 964 हो गई, जिससे यात्रियों की संख्या 1,01,241 तक पहुंच गई। हालांकि, इसके बाद उड़ानों और यात्रियों की संख्या में कमी आई। नवंबर 2025 में 906 उड़ानें हुईं और 1,22,381 यात्री आए। दिसंबर में यह संख्या घटकर 586 उड़ानें और 76,164 यात्री रह गई.


निष्कर्ष

मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, कुल 614 उड़ानों में केवल 79,161 यात्रियों ने यात्रा की। यह दर्शाता है कि उड़ानों की कमी के साथ-साथ यात्रियों की संख्या में भी गिरावट आई है, जबकि पहले अधिक उड़ानों के साथ यात्रियों की संख्या बढ़ रही थी.