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अशोक खेमका ने एसवाई कुरैशी के बयान पर जताई आपत्ति

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। कुरैशी ने ज्ञानेश कुमार को अमित शाह का करीबी सहयोगी बताया और अनुच्छेद 370 के हटने में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए। खेमका ने इसे गर्व का विषय बताते हुए व्यक्तिगत हमलों की निंदा की। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की प्रक्रिया के बारे में।
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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त के बयान पर प्रतिक्रिया

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। एक पॉडकास्ट में कुरैशी ने कहा कि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी सहयोगी हैं और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार राम मंदिर ट्रस्ट के गठन में भी शामिल थे। कुरैशी ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार अतिरिक्त सचिव और सचिव पैनल के लिए अयोग्य थे।


अनुच्छेद 370 का हटना गर्व का विषय

अशोक खेमका ने कुरैशी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 का हटना एक गर्व का विषय है। उन्होंने व्यक्तिगत हमलों और निचले स्तर की टिप्पणियों की निंदा की। अपने 'एक्स' अकाउंट पर उन्होंने लिखा, 'एक पूर्व CEC द्वारा इस तरह के निचले स्तर के प्रहार करना शोभा नहीं देता। असहमति होना जायज है, लेकिन व्यक्तिगत छींटाकशी करना नहीं। अनुच्छेद 370 को हटाना गर्व का विषय और एक राष्ट्रीय उपलब्धि है। राजनीतिक द्वेष के ऊपर संवैधानिक गरिमा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।'


एसवाई कुरैशी का पॉडकास्ट में बयान

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने 'लंदन वार्ता' पॉडकास्ट में भाग लिया, जहां उन्होंने चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर चर्चा की। कुरैशी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार अमित शाह के करीबी सहयोगी रहे हैं और उन्होंने गृह मंत्रालय में उनके अधीन काम किया। उन्होंने यह भी बताया कि ज्ञानेश कुमार कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की प्रक्रिया के मुख्य रणनीतिकारों में से एक थे।


ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की प्रक्रिया

कुरैशी ने बताया कि 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन किया जाना था। नए कानून के तहत, सरकार ने तीन लोगों को नामों पर विचार करने के लिए बुलाया, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह शामिल थे। इस प्रक्रिया के दौरान ज्ञानेश कुमार का चयन किया गया।