उत्तराखंड में ग्रामीण डाक सेवक भर्ती पर उठे सवाल, हरियाणा के युवाओं का चयन
भर्ती परिणामों से बढ़ी चिंता
उत्तराखंड में ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) भर्ती के परिणामों ने स्थानीय युवाओं के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है। पिथौरागढ़ जिले में 65 पदों में से 60 पर चयन हरियाणा के अभ्यर्थियों का हुआ है, जिनमें से 50 ने हाईस्कूल में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इस स्थिति ने स्थानीय युवाओं के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि उन्हें अपने ही राज्य में रोजगार के अवसरों से वंचित क्यों रहना पड़ रहा है।
चयन प्रक्रिया की विशेषताएँ
ग्रामीण डाक सेवक भर्ती की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें चयन दसवीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। पिथौरागढ़ में हालिया परिणामों ने इस प्रक्रिया पर चर्चा को और तेज कर दिया है।
हरियाणा के अभ्यर्थियों का चयन
सूत्रों के अनुसार, लगभग दो महीने पहले जिले में 51 पदों के लिए हुई भर्ती में 31 पदों पर नियुक्ति हुई, जिसमें 28 अभ्यर्थी हरियाणा के थे और केवल तीन उत्तराखंड के। इस प्रकार के परिणामों से स्थानीय युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है।
चुनौतियाँ और सवाल
इस मामले में एक गंभीर सवाल यह है कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों को हिंदी में काम करने में कठिनाई हो रही है। यह दावा किया जा रहा है कि हिंदी में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले कुछ ग्रामीण डाक सेवकों को सरकारी कार्यों में समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर हरियाणा के अभ्यर्थियों के चयन को लेकर विरोध और चर्चा बढ़ गई है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र भट्ट ने भी परिणामों पर आश्चर्य व्यक्त किया है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब हिंदी में अच्छे अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को काम में कठिनाई हो रही है, तो चयन प्रक्रिया की जांच क्यों नहीं की जा रही।
कोरोना का प्रभाव
कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद होने के कारण कई राज्यों में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं नहीं हो पाईं। हरियाणा में भी छात्रों को बिना परीक्षा के अगली कक्षा में प्रमोट किया गया था। ऐसे में कई छात्रों के शत-प्रतिशत अंक आ गए। अब डाक सेवा में भर्ती 10वीं की मेरिट के आधार पर होती है, जिससे कोरोना काल के दौरान पास हुए उम्मीदवारों को लाभ मिल सकता है।
