केंद्र सरकार का DILRMP 3.0: भूमि अभिलेखों का डिजिटल रूपांतरण
DILRMP 3.0 का परिचय
केंद्र सरकार ने DILRMP 3.0 के तहत भूमि से संबंधित दस्तावेजों को पूरी तरह से डिजिटल और सरल बनाने की योजना बनाई है। DILRMP 3.0 का अर्थ है डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम, जो अब अपने तीसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। यह एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है, जिसे ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य भूमि से संबंधित प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और आम जनता के लिए सुविधाजनक बनाना है।
योजना का बजट और अवधि
यह योजना 2026 से 2031 तक, यानी पांच वर्षों के लिए लागू होगी, जिसके लिए सरकार ने ₹565.50 करोड़ का बजट निर्धारित किया है। इस योजना के अंतर्गत भूमि के डिजिटल नक्शे, स्वामित्व, पंजीकरण और भूमि विवादों की जानकारी को एकीकृत किया जाएगा। इसके लिए GIS (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) का उपयोग करते हुए 'Land Stack' नामक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी।
भू-आधार: हर भूमि के लिए एक अद्वितीय पहचान
इस योजना के तहत, प्रत्येक भूमि को एक विशेष 14 अंकों का नंबर दिया जाएगा, जिसे 'भू-आधार' कहा जाएगा। जैसे हर व्यक्ति का आधार कार्ड नंबर अलग होता है, वैसे ही हर भूमि की अपनी एक अलग पहचान होगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि कौन सी भूमि किसकी है और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं हो सकेगी.
डिजिटल नक्शे और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
इस योजना का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि सभी भूमि के नक्शे डिजिटल रूप से तैयार किए जाएंगे और उन्हें सही स्थान (GPS) से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, भूमि या संपत्ति की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अब बिना किसी कागज के होगी। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिसके लिए 75 रजिस्ट्रेशन कार्यालयों को अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें लगभग 37.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे.
भूमि विवादों का त्वरित समाधान
भूमि विवादों को लेकर आमतौर पर कोर्ट में सालों तक मामले चलते हैं, लेकिन अब एक नया सिस्टम, RCCMS (राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली) स्थापित किया जाएगा, जिससे भूमि के मुकदमों पर नजर रखी जाएगी। इससे लोगों का समय बचेगा और कोर्ट-कचहरी पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी.
शहरी क्षेत्रों के लिए विशेष परियोजना
शहरी क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड को सुधारने के लिए NAKSHA नामक एक अलग परियोजना पर भी कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही, विभिन्न सरकारी सिस्टम API के माध्यम से आपस में जुड़े रहेंगे, जिससे लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनकी दैनिक जिंदगी और व्यवसाय दोनों को आसान बनाया जा सकेगा.
