भारत में एथेनॉल की बढ़ती खपत और उत्पादन: एक विस्तृत विश्लेषण
एथेनॉल की चर्चा और इसकी आवश्यकता
वर्तमान में, एथेनॉल के बारे में देश में व्यापक चर्चा हो रही है। यह रासायनिक यौगिक, जो पेट्रोल में मिलाया जा रहा है, पिछले कुछ वर्षों में विवादों और चर्चाओं का केंद्र बन गया है। पिछले पांच वर्षों में, एथेनॉल की ब्लेंडिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, पांच साल पहले पेट्रोल में 8 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था, जबकि 2026 तक यह मात्रा 20 प्रतिशत तक पहुंचने की योजना है। इस बदलाव के परिणामस्वरूप, भारत में एथेनॉल का उत्पादन और खपत दोनों में वृद्धि हुई है। भविष्य में, पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
E25 की टेस्टिंग और भविष्य की योजनाएं
हाल ही में, सरकार ने E25 की टेस्टिंग शुरू करने की जानकारी दी है, जिसका अर्थ है कि एक लीटर पेट्रोल में 25 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का प्रयोग किया जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पहले ही संकेत दिया है कि भविष्य में एथेनॉल की ब्लेंडिंग 80 से 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस संदर्भ में, यह जानना महत्वपूर्ण है कि भविष्य में एथेनॉल की कितनी आवश्यकता होगी।
एथेनॉल क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों?
एथेनॉल, जो मक्का, चावल, सड़े हुए अनाज और गन्ने के रस से बनाया जाता है, एक रासायनिक यौगिक है। इसे पहले शराब, दवाइयों और ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता था। इसकी ज्वलनशीलता के कारण, इसे पेट्रोल में मिलाने का निर्णय लिया गया ताकि पेट्रोल की आवश्यकता को कम किया जा सके और भारत आयात पर निर्भरता को कम कर सके।
एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का इतिहास
केंद्र सरकार ने 10 जुलाई 2026 को बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की शुरुआत 2001 में हुई थी। 2004 में इसका आधिकारिक एलान हुआ और 2006 में E5 ब्लेंडिंग शुरू की गई। हालांकि, 2014 तक केवल 1.5 प्रतिशत ब्लेंडिंग ही हो पाई थी। उस समय, गन्ने के रस और मौसमी फसलों पर निर्भरता थी, जिससे सालाना एथेनॉल उत्पादन मुश्किल से 400 करोड़ लीटर था।
2018 के बाद एथेनॉल उत्पादन में वृद्धि
केंद्र सरकार ने मई 2018 में नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स की शुरुआत की। 2021 में, भारत की प्रमुख तेल कंपनियों ने एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए डेडिकेटेड एथेनॉल प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई। इस प्रयास से उत्पादन और ब्लेंडिंग की क्षमता में वृद्धि हुई। 2021 में, जब 10 प्रतिशत ब्लेंडिंग का लक्ष्य था, तब भारत की आवश्यकता लगभग 500 से 600 करोड़ लीटर थी, जो कुछ ही वर्षों में 1200 करोड़ लीटर तक पहुंच गई।
एथेनॉल की खपत और उत्पादन
सरकार द्वारा समय-समय पर जारी आंकड़ों के अनुसार, 2013-14 में पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग केवल 38 करोड़ लीटर थी, जो 2020-21 में 302.3 करोड़ लीटर तक पहुंच गई। इस दौरान, पेट्रोल की खपत में 64 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 5 जुलाई 2026 को, सरकार ने बताया कि 2025-26 में एथेनॉल ब्लेंडिंग 1200 करोड़ लीटर से अधिक हो गई है।
एथेनॉल का स्रोत
केंद्र सरकार ने बताया कि देश में 499 डिस्टलरी हैं, जो एथेनॉल का उत्पादन करती हैं। इनकी कुल क्षमता 1822 करोड़ लीटर है। 30 जून 2025 तक, इन कंपनियों ने 587 करोड़ लीटर एथेनॉल तेल कंपनियों को बेचा। भारत में एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का, चावल और अन्य अनाजों से बनाया जाता है।
एथेनॉल के लाभ
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिलाने से केवल गाड़ी के माइलेज में सुधार नहीं होता, बल्कि इससे भारत ने 2014-15 से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई है। इसके अलावा, 316 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल कम खरीदना पड़ा और 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन रोका गया। एथेनॉल उत्पादन के लिए आवश्यक अनाज खरीदने से किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये का लाभ हुआ है।
