भारत में भारी वैक्यूम बॉयलर की यात्रा: चुनौतियाँ और खर्च
विशाल वैक्यूम बॉयलर की यात्रा
हाल ही में, एक विशाल वैक्यूम बॉयलर जो बेल्जियम से समुद्र के रास्ते भारत आया है, चर्चा का केंद्र बन गया है। यह बॉयलर ओडिशा के पारदीप बंदरगाह से निकलकर झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश के वाराणसी पहुंचा है। इसका वजन 200 टन से अधिक है और इसे बलरामपुर चीनी मिल तक पहुंचाना है। हालांकि, इसकी संरचना के कारण इसे रास्ते में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेष ट्रेलर का उपयोग
इस भारी मशीन को ले जाने के लिए 308 पहियों वाला एक विशेष ट्रेलर तैयार किया गया है। यह ट्रेलर लगभग 100 फीट लंबा और 7 मीटर चौड़ा है। इतनी बड़ी गाड़ी के लिए सामान्य सड़कें अपर्याप्त साबित हो रही हैं, जिसके चलते रास्ते में कई स्थानों पर सड़क को चौड़ा किया जा रहा है। इसके लिए कई फुट ओवरब्रिज, टोल प्लाजा के हिस्से, और बिजली के तारों को अस्थायी रूप से हटाया जा रहा है।
ओवरब्रिज का हटाया जाना
वाराणसी में ट्रेलर के पहुंचने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। डाफी टोल प्लाजा के पास सड़क को चौड़ा करने के लिए बाईं ओर का हिस्सा तोड़ा गया है। इसके अलावा, मोहनसराय और रिंग रोड हरहुआ से संदहा के पास बने फुट ओवरब्रिज को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ट्रैफिक पुलिस और तकनीकी टीम के अनुसार, ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ट्रेलर को कुछ स्थानों पर सड़क की विपरीत दिशा से निकाला जाएगा।
दैनिक खर्च और यात्रा की गति
रास्ते में रुकावटों और सफाई में लगने वाले समय के कारण, यह ट्रेलर प्रतिदिन मुश्किल से 10 से 12 किलोमीटर की दूरी तय कर पा रहा है। यदि सब कुछ सही रहा, तो इसकी अधिकतम गति 20 किमी प्रति दिन तक पहुंच सकती है। ड्राइवर के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 200 लीटर डीजल की खपत हो रही है, और अब तक इसमें 2 करोड़ रुपये से अधिक का डीजल खर्च हो चुका है। इसकी सुरक्षा के लिए 14 गाड़ियों का काफिला साथ चल रहा है, जिसमें चढ़ाई पर खींचने के लिए अलग ट्रक, 2 जेसीबी, 2 हाइड्रा क्रेन, 2 ट्रेलर और इंजीनियरों की टीमें शामिल हैं।
