भारतीय रेलवे में इंजन की कमी से ट्रेनों में देरी
ट्रेनों की देरी का कारण
हाल ही में एक ट्रेन लगभग 5 घंटे की देरी से पहुंची, जिसका कारण यह था कि उसे चलाने के लिए जो इंजन लगाया गया, वह सवारी गाड़ी का नहीं था। रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि देश में सवारी ट्रेनों के लिए इंजन की कमी हो रही है। कई ट्रेनें तो मालगाड़ियों के इंजन से चलाई जा रही हैं, जिससे लगातार देरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। हर महीने सैकड़ों मामले ऐसे सामने आ रहे हैं, जहां सवारी ट्रेनों के लिए मालगाड़ी के इंजन का उपयोग किया जा रहा है। इस समस्या को हल करने के लिए रेल मंत्रालय ने 2026-27 में 492 और 2027-28 में 187 नए इंजनों के उत्पादन को मंजूरी दी है।
इंजन की कमी के कारण देरी
अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न रेलवे जोनों से हर महीने औसतन 80 से 100 मामले सामने आते हैं, जिनमें यात्री ट्रेनों में मालगाड़ी के इंजन लगाए जाते हैं। कई बार कम गति वाले इंजनों के कारण ट्रेनें अपने गंतव्य तक पहुंचने में कई घंटे की देरी कर देती हैं। उदाहरण के लिए, 3 सितंबर 2026 को ट्रेन नंबर 11044 (बलिया-दादर सेंट्रल एक्सप्रेस) को सही यात्री इंजन नहीं मिलने के कारण 5 घंटे 28 मिनट की देरी का सामना करना पड़ा।
रेलवे के पास इंजन की संख्या
सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे के पास लगभग 17,900 इंजन हैं, जिनमें से लगभग 13,700 बिजली से चलने वाले और 4,200 डीजल इंजन हैं। इनमें से केवल 3,400 बिजली वाले इंजन यात्री ट्रेनों के लिए उपयोग किए जाते हैं। डीजल इंजनों में से भी केवल 284 यात्री ट्रेनों के लिए हैं।
इंजन उत्पादन बढ़ाने की योजना
रेल मंत्रालय ने इंजन उत्पादन की गति बढ़ाने का निर्णय लिया है। 2026-27 में 492 और 2027-28 में 187 यात्री ट्रेन इंजनों के उत्पादन को मंजूरी दी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2014 से पहले इंजन निर्माण की अनदेखी के कारण कमी आई थी, जिसे अब धीरे-धीरे पूरा किया जाएगा।
