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भारतीय वायु सेना को HAL द्वारा सौंपे गए नए तेजस और ध्रुव हेलीकॉप्टर

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारतीय वायु सेना को दो सीटों वाले तेजस ट्रेनर लड़ाकू विमानों और ध्रुव हेलीकॉप्टरों का वितरण किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस लेख में तेजस और ध्रुव की विशेषताएँ, मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट की प्रगति, और वायुसेना की स्वदेशी तकनीक पर ध्यान केंद्रित किया गया है। जानें कैसे ये कदम भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रहे हैं।
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तेजस और ध्रुव हेलीकॉप्टर का महत्व

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने बेंगलुरु में भारतीय वायु सेना को दो सीटों वाले अंतिम तेजस ट्रेनर लड़ाकू विमानों का वितरण किया है। ये विमान लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (LCA) श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा, HAL ने तीन हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 बेसिक ट्रेनर विमानों का भी वितरण किया है। पवन हंस लिमिटेड को चार ध्रुव नेक्स्ट जनरेशन हेलीकॉप्टर भी प्राप्त हुए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे देश की उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.


रक्षा मंत्री का बयान

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। अब आधुनिक उपकरण देश में ही निर्मित हो रहे हैं, और सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी उद्योग को भी समान अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एयरोस्पेस क्षेत्र में परिवर्तन धीरे-धीरे होता है, और हर छोटे हिस्से को मजबूत बनाना आवश्यक है.


तेजस ट्रेनर विमान की विशेषताएँ

तेजस ट्रेनर विमान पायलटों को फ्रंटलाइन फाइटर की तैयारी में सहायता करेगा। एचटीटी-40 अब देश में निर्मित हो रहा है, जबकि पहले बुनियादी प्रशिक्षण के लिए विदेशी विमानों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस विमान की विदेशों में भी मांग बढ़ने की संभावना है.


ध्रुव हेलीकॉप्टर की विशेषताएँ

ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर नागरिक उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें आधुनिक तकनीक और अधिक शक्तिशाली इंजन शामिल हैं। यह यात्री परिवहन, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और ऑफशोर कार्यों में उपयोगी होगा.


मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट की प्रगति

भारतीय वायुसेना (IAF) ने हाल के वर्षों में स्वदेशी हथियारों और तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। रक्षा मंत्रालय की 2025 की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, वायुसेना ने कई महत्वपूर्ण स्वदेशी विमानों और हेलीकॉप्टरों के लिए बड़े अनुबंध किए हैं। 25 सितंबर 2025 को, रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 97 तेजस MK1A लड़ाकू विमानों का अनुबंध किया, जिसकी लागत लगभग 62,370 करोड़ रुपये है। इन विमानों में 64 प्रतिशत से अधिक सामग्री भारत में निर्मित है.


वायुसेना की स्वदेशी तकनीक की स्थिति

रक्षा मंत्रालय की 2025 की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, वायुसेना ने 509 वस्तुओं की 'पॉजिटिव इंडिजनाइजेशन लिस्ट' तैयार की है, जिनका निर्माण अब भारत में ही होगा। इनमें से 138 वस्तुएं वायुसेना से संबंधित हैं। पिछले एक दशक में, वायुसेना ने लगभग 76,000 स्पेयर पार्ट्स को स्वदेशी बनाया है, जिससे वित्त वर्ष 2024-25 में 1,482 स्पेयर पार्ट्स के निर्माण से लगभग 406 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है.


ड्रोन तकनीक पर वायुसेना का ध्यान

वायुसेना ड्रोन और मानवरहित विमानों की तकनीक पर भी काम कर रही है। इसके लिए 'मेहर बाबा कॉम्पिटिशन' नामक योजना शुरू की गई है, जो भारतीय स्टार्टअप को ड्रोन तकनीक विकसित करने का अवसर प्रदान करती है. इस प्रतियोगिता में विजेता टीम को स्वार्म ड्रोन सिस्टम बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है.


मिशन तेजस की प्रगति

17 अक्टूबर 2025 को, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HAL की नासिक फैक्ट्री में तेजस MK1A की तीसरी उत्पादन लाइन का उद्घाटन किया। इस लाइन से हर साल आठ विमानों का निर्माण संभव होगा, जिससे HAL अब कुल मिलाकर हर साल 24 तेजस विमानों का निर्माण कर सकेगी.


वायुसेना के भविष्य की योजनाएँ

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश का कुल रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 1,51,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष से 18 प्रतिशत अधिक है. सरकार ने 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3,00,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है.