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मुजफ्फरनगर के जज रवि कुमार दिवाकर का तबादला, फैमिली कोर्ट में नई जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर का तबादला हुआ है। उन्हें अब फैमिली कोर्ट का अतिरिक्त प्रिंसिपल जज बनाया गया है। उनके कार्यकाल में 36 मौत की सजाएं सुनाई गईं, जिसमें हाल ही में एक व्यक्ति को अपनी पत्नी को जिंदा जलाने के मामले में सजा दी गई। दिवाकर ने कई महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय लिए हैं, जिनमें ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे भी शामिल है। उनके फैसलों के बाद उन्हें धमकियां भी मिलीं, जिससे उनकी सुरक्षा पर सवाल उठे।
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जज का तबादला और नई भूमिका

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर का स्थानांतरण कर दिया गया है। अब उन्हें मुजफ्फरनगर की फैमिली कोर्ट का अतिरिक्त प्रिंसिपल जज नियुक्त किया गया है। उनके कार्यकाल के दौरान मुजफ्फरनगर और बरेली में कुल 36 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई।


मौत की सजाओं का रिकॉर्ड

जज दिवाकर को 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर के फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 का प्रिसाइडिंग ऑफिसर बनाया गया था। उन्होंने मुजफ्फरनगर और शामली जिलों में आपराधिक मामलों की सुनवाई की। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच उन्होंने 11 मामलों में 23 लोगों को मौत की सजा सुनाई।


विशेष मामले और विवाद

7 सितंबर को, उन्होंने अपनी 23वीं मौत की सजा एक ऐसे व्यक्ति को सुनाई जिसने अपनी पत्नी को जिंदा जला दिया था। बरेली में भी उन्होंने 13 मौत की सजाएं दी थीं। अतिरिक्त सत्र जज शिव कुमारी को अब फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में स्थानांतरित किया गया है।


अगस्त में, उनके कोर्ट से 97 लंबित केस फाइलें वापस ले ली गई थीं, जिनमें हत्या और अन्य गंभीर अपराध शामिल थे। ये फाइलें तब के जिला और सत्र जज बिरेंद्र कुमार सिंह के आदेश पर वापस ली गई थीं।


सुरक्षा चिंताएं और धमकियां

जज रवि कुमार दिवाकर ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में प्रशासनिक आधार पर केस वापस लेने पर सवाल उठाए थे। सर्वे आदेश के बाद उन्हें धमकियां मिलीं, जिसके चलते उनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। 2024 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नंबरों से मिली धमकियों की शिकायत की।


रवि कुमार दिवाकर का परिचय

रवि कुमार दिवाकर 46 वर्ष के हैं और 2009 में यूपी न्यायिक सेवा में जज के रूप में शामिल हुए। उन्होंने बीकॉम, एलएलबी और एलएलएम की डिग्री प्राप्त की है। पहले वे आजमगढ़, सुल्तानपुर और बदायूं में कार्यरत रहे। अप्रैल 2021 से जुलाई 2022 तक वाराणसी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रहे, फिर बरेली गए। अब वे मुजफ्फरनगर फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रिंसिपल जज के रूप में कार्य करेंगे।