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वकीलों के लिए सोशल मीडिया पर नए दिशा-निर्देश: BCI की सख्ती

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने वकीलों के लिए सोशल मीडिया पर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें रील बनाने और न्यायिक प्रक्रियाओं को साझा करने पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा भेजे गए नोटिस के जवाब में उठाया गया है। नए नियमों में वकीलों को अनैतिक प्रचार से बचने और मुवक्किलों की गोपनीयता का सम्मान करने की सलाह दी गई है। BCI ने वकीलों को चेतावनी दी है कि अगर वे इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
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सोशल मीडिया पर वकीलों की गतिविधियों पर नकेल

यदि आप एक वकील हैं और सोशल मीडिया पर रील बनाने का शौक रखते हैं, तो सावधान रहें। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) आपकी गतिविधियों पर नजर रख रही है। अगर आपने सोशल मीडिया पर अपने प्रचार के लिए जमानत दिलाने के दावे किए या भौकाली रील बनाई, तो आप अपने लाइसेंस को भी खो सकते हैं। पुलिस और डॉक्टरों के बाद अब वकीलों की ऑनलाइन गतिविधियों पर भी नियंत्रण लगाया गया है। BCI ने वकीलों के सोशल मीडिया उपयोग के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को वकीलों से संबंधित जनहित याचिका के मामले में BCI को नोटिस भेजा था। इसके जवाब में, BCI ने शुक्रवार को एक सर्कुलर जारी किया, जिसमें वकीलों, कानून के छात्रों, इंटर्न्स और लीगल एजुकेटर्स के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर नैतिक दिशा-निर्देश दिए गए हैं.


BCI के नए नियमों की जानकारी

BCI ने वकीलों की आदतों पर चिंता जताई है, जो रील्स, शॉर्ट वीडियो और न्यायिक प्रक्रियाओं को सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। BCI ने मुवक्किलों को लुभाने के लिए इंस्टाग्राम पर सनसनीखेज जानकारियों को रोकने और AI के दुरुपयोग को तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं।


सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया का उपयोग कानूनी जागरूकता और शैक्षणिक चर्चा के लिए किया जा सकता है, लेकिन इससे अदालतों की गरिमा, मुवक्किलों की गोपनीयता और न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कम नहीं होना चाहिए। BCI ने कोर्ट की सुनवाई के रील्स, एडिटेड क्लिप्स और व्यक्तिगत कमेंट्री बनाने के चलन को चिंताजनक बताया है।


वकीलों के लिए सोशल मीडिया पर नए दिशा-निर्देश: BCI की सख्ती


कोर्ट क्लिप साझा करने पर प्रतिबंध

BCI ने न्यायिक प्रक्रिया के वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक लगाई है। अब वकील कोर्ट की रिकॉर्डिंग और लाइव-स्ट्रीम के क्लिप्स साझा नहीं कर सकेंगे। BCI का कहना है कि चुनिंदा क्लिपिंग, ड्रामेटिक एडिटिंग और संदर्भ से बाहर पेश करने से जजों, वकीलों और पक्षकारों का मजाक उड़ाया जाता है, जिससे अदालतों पर जनता का भरोसा घटता है।


AI के दुरुपयोग पर रोक

सर्कुलर में AI टूल्स के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की गई है। डीपफेक, वॉइस क्लोनिंग, जाली जजमेंट, और फर्जी मामलों का जिक्र कर केस को मजबूत करने के प्रयासों को गंभीर खतरा बताया गया है।


वकीलों के लिए सोशल मीडिया पर नए दिशा-निर्देश: BCI की सख्ती


सोशल मीडिया पर मुवक्किल बनाने पर रोक

BCI ने स्पष्ट किया है कि वकालत एक सार्वजनिक सेवा है, न कि साधारण व्यापार। वकील प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम की तलाश नहीं कर सकते। गारंटीड रिजल्ट, सफलता के दावे, सनसनीखेज थंबनेल, क्लिकबेट टाइटल या खुद को बेहतर बताने वाले पोस्ट अनैतिक माने जाएंगे।


BCI के नए प्रतिबंधों की सूची

अब वकील कोर्ट परिसर, कोर्टरूम, गलियारे या चैंबर में रील्स, वीडियो या फोटो नहीं बना सकते। कोर्ट के अंदर बैंड-गाउन पहनकर सोशल मीडिया पर प्रमोशन या ब्रांडिंग भी मना है। कोर्ट की सुनवाई को बिना अनुमति रिकॉर्ड करना, एडिट करके म्यूजिक, कैप्शन या वॉइसओवर लगाकर शेयर करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।


वकील अब कोर्ट बिल्डिंग, अपना बैंड-गाउन, केस लिस्ट या क्लाइंट के दस्तावेजों को व्यक्तिगत ब्रांडिंग या मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते। क्लाइंट की गोपनीय जानकारी, केस की रणनीति या निजी बातचीत साझा करना भी मना है। वकील खुद जो काम नहीं कर सकते, वो अपने इंटर्न या स्टाफ से भी नहीं करवा सकते।


'रीलबाजी वकीलों के लिए नहीं है'

BCI ने कहा है कि वकील लंबित मामलों पर ऐसे कमेंट नहीं कर सकते जो केस को प्रभावित कर सकें। वकील अपनी लाइफस्टाइल, फैशन, लग्जरी या व्यक्तिगत पोस्ट को वकील होने की पहचान से जोड़कर ग्लैमराइज नहीं कर सकते। फेक जजमेंट, झूठी साइटेशन्स, बनावटी सफलता की कहानियां या टेस्टिमोनियल्स पोस्ट करना प्रतिबंधित है।


वकीलों के लिए सोशल मीडिया पर नए दिशा-निर्देश: BCI की सख्ती


'ऑनलाइन गारंटी दी तो लाइसेंस जा सकता है'

सोशल मीडिया पर कुछ वकील दावा करते हैं कि वे किसी केस में गारंटी से जमानत दिला देंगे। ऐसे क्लिकबेट वाले दावे, सोशल मीडिया पर भारी पड़ सकते हैं। वकील पेड प्रमोशन नहीं कर सकते हैं।


इंटर्नशिप करने वाले छात्रों के लिए नए नियम

कानून के छात्रों को एडमिशन और इंटर्नशिप से पहले एक अंडरटेकिंग देना होगा कि वे न्यायिक प्रक्रिया और फाइलों को गोपनीय बनाए रखेंगे, कोर्ट की सामग्री रिकॉर्ड या शेयर नहीं करेंगे और नैतिकता का पालन करेंगे।


क्या अनुमति है?

BCI ने जिम्मेदारी से कानूनी जागरूकता फैलाने, जजमेंट्स की पढ़ाई-चर्चा, सटीक कानूनी रिपोर्टिंग और पब्लिक एजुकेशन की अनुमति दी है। रील बना सकते हैं लेकिन वे सही हों, उनका संदर्भ हो, किसी का प्रचार न करते हों और सनसनीखेज न हों। उनका सामाजिक संदेश होना चाहिए।


नियमों का उल्लंघन करने पर क्या होगा?

अगर वकीलों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलीं, तो जांच की जाएगी और एडवोकेट एक्ट के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट में BCI के अवमानना के तहत कार्रवाई की जाएगी।


BCI के इस फैसले की वजह

दिल्ली के दो वकीलों अनिल पांडे और एआर त्रिपाठी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका वकीलों की ऑनलाइन कैंपेनिंग, सोशल मीडिया पर खुद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और क्लाइंट जुटाने के खिलाफ थी। याचिकाकर्ताओं ने BCI को निर्देश देने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि BCI यह सुनिश्चित करे कि एडवोकेट एक्ट का पालन सख्ती से हो। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के पहले ही दिन पक्षकारों को नोटिस दे दिया था।