विदेश मंत्री जयशंकर ने आतंकवाद और वैश्विक संघर्षों पर दी चेतावनी
जयशंकर का बयान: युद्ध का खतरा और शांति का महत्व
नई दिल्ली में चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि विश्व में कहीं भी युद्ध का होना सभी जगह की शांति के लिए एक गंभीर खतरा है। विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों के संदर्भ में, उन्होंने शांति की आवश्यकता पर जोर दिया और बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से समस्याओं के समाधान की बात की।
वैश्विक संघर्षों का प्रभाव
विदेश मंत्री ने बताया कि वर्तमान में यूक्रेन और पश्चिम एशिया में दो प्रमुख संघर्ष चल रहे हैं। ऐसे समाज और अर्थव्यवस्थाएं, जिनका इन संघर्षों में कोई सीधा संबंध नहीं है, भी इसके दुष्परिणामों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए। जब हम बातचीत और कूटनीति को समाधान के रूप में प्रस्तुत करते हैं, तो भारत इसी भावना का प्रतिनिधित्व करता है।
आतंकवाद: एक गंभीर खतरा
आतंकवाद क्यों बना खतरा? जयशंकर ने बताया
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद शांति के लिए एक गंभीर खतरा है। किसी देश की नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए आतंकवाद का उपयोग करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता और इसके पक्ष में कोई तर्क नहीं दिया जा सकता।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की आवश्यकता
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि आतंकवाद का खतरा इसलिए बना हुआ है क्योंकि सभी देश इसे पूरी तरह से नकारने की नीति नहीं अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास से मिले सबक के बावजूद, कुछ देश अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए, दुनिया को इस साझा खतरे के प्रति सजग रहना चाहिए और आतंकवाद के सभी रूपों का मुकाबला करने के लिए एकजुट होना चाहिए।
