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सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का में एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। यह समझौता हूती विद्रोहियों और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच किया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया दी है और घटनाक्रम पर नजर रखने की बात कही है। इसके अलावा, सऊदी अरब एक नौसैनिक गठबंधन भी बना रहा है, जिसमें कई देशों ने भागीदारी की है।
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सऊदी अरब में ऐतिहासिक रक्षा समझौता

शुक्रवार को मक्का में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के अनुसार, यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे सभी देशों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता हूती विद्रोहियों और ईरान के साथ सऊदी अरब के बढ़ते तनाव के बीच किया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वे इसे ध्यान से देख रहे हैं।


 


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'यह एक महत्वपूर्ण घटना है जिस पर हम बारीकी से नजर रख रहे हैं। हम आपको इसके बारे में जानकारी देते रहेंगे।'


 


उन्होंने सोमालिया और पाकिस्तान के बीच हो रहे रक्षा सहयोग पर भी टिप्पणी की और कहा, 'हम उन गतिविधियों पर ध्यान दे रहे हैं जो सोमालिया और दूसरे देश के बीच हो रही हैं। बस इतना ही कहना है।'


 



 


समझौते की मुख्य बातें

एक देश पर हमला सभी पर माना जाएगा


मक्का में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान, सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए। इस बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन शामिल थे।


 


इस समझौते का उद्देश्य किसी भी प्रकार के हमले के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है। यह नाटो के आर्टिकल 5 के समान है, जिसमें कहा गया है कि यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो यह सभी पर हमला माना जाएगा।


 


सऊदी अरब का नौसैनिक गठबंधन

नौसैनिक गठबंधन भी बना रहा सऊदी अरब


इस समझौते के अलावा, सऊदी अरब एक नौसैनिक गठबंधन भी स्थापित कर रहा है। पाकिस्तान सहित लगभग 14 देशों ने इस बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन में शामिल होने की सहमति दी है। इसका उद्देश्य लाल सागर और बाब अल-मंडेब में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। सऊदी अरब ने लगभग 50 देशों को इस गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि भारत को भी कोई आमंत्रण भेजा गया है।