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स्मृति ईरानी ने हरियाणा में बीजेपी नेताओं की सुरक्षा हटाने का किया अनुरोध

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने हरियाणा में जिला अध्यक्षों की सुरक्षा हटाने का अनुरोध किया है। उन्होंने बैठक में रीलबाजी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि नेताओं को आम जनता से जुड़ने के लिए सुरक्षा घेरे से बाहर आना चाहिए। यह कदम संगठन में वीआईपी संस्कृति को खत्म करने और कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाने के लिए उठाया गया है। जानें इस सख्त कदम के पीछे की वजह और बीजेपी की नई रणनीति के बारे में।
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स्मृति ईरानी का हरियाणा दौरा

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राष्ट्रीय महासचिव और हरियाणा की प्रभारी स्मृति ईरानी ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि सभी बीजेपी जिला अध्यक्षों की सुरक्षा हटा दी जाए। शुक्रवार को पंचकूला में आयोजित एक बैठक के दौरान, स्मृति ईरानी ने बीजेपी नेताओं की रीलबाजी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जिला स्तर के नेता सुरक्षा घेरे में रहेंगे, तो आम जनता उनसे कैसे जुड़ पाएगी।


स्मृति ईरानी की सख्ती का कारण

स्मृति ईरानी ने हाल ही में हरियाणा प्रभारी का पद संभाला है, और यह उनका पहला दौरा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि रीलबाजी अब नहीं चलेगी। बीजेपी के सूत्रों के अनुसार, यह संदेश राष्ट्रीय स्तर पर भी फैलाया जाएगा। पार्टी का उद्देश्य चुनाव में हाई प्रोफाइल नेता के बजाय आम कार्यकर्ता और जनसेवक के रूप में पदाधिकारियों को जनता से संवाद करना है।


सुरक्षा घेरे पर सवाल

बीजेपी के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि गुरुग्राम के कई जिला अध्यक्ष सोशल मीडिया पर रील बनाते हैं। स्मृति ईरानी के पास उनकी कुछ तस्वीरें पहुंची, जिसके बाद उन्होंने सख्ती दिखाई। पंचकूला में जिलाध्यक्षों की बैठक में भी इसी तरह की रीलबाजी हो रही थी।


वीआईपी संस्कृति पर नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, हरियाणा बीजेपी की महत्वपूर्ण बैठक से पहले, गुरुग्राम के 'गुरुकमल' दफ्तर में पुलिस बल की स्थायी तैनाती की शिकायतों पर स्मृति ईरानी ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि नेताओं को अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच सुरक्षा घेरे की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। संगठन में वीआईपी संस्कृति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बाद, राज्य भर के जिला अध्यक्षों के वाहनों से सुरक्षाकर्मी हटा दिए गए।


संगठन में संतुलन

स्मृति ईरानी की नियुक्ति को केंद्र द्वारा हरियाणा की राजनीति में शक्ति संतुलन साधने की एक कोशिश माना जा रहा है। वह संगठन में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रभाव वाले समीकरणों के बीच, पार्टी ने एक निष्पक्ष चेहरे को कमान सौंपी है।


बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना

पार्टी अगले तीन महीनों में राज्य के प्रत्येक बूथ पर 11 सदस्यीय समितियों का गठन या पुनर्गठन करेगी। इसके अलावा, हर बूथ पर 'पन्ना प्रमुख' नियुक्त किए जाएंगे, जो मतदाता सूची के पन्नों से जुड़े मतदाताओं से संपर्क बनाए रखेंगे।