ED की GMADA ऑफिस में छापेमारी का दूसरा दिन: जमीन सौदों की जांच जारी
ED की छापेमारी का दूसरा दिन
मोहाली में ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के मुख्यालय में इनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की तलाशी का कार्य बुधवार को भी जारी रहा। यह कार्रवाई GMADA के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निजी रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े भूमि लाभ, चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) मंजूरियों, भूमि अधिग्रहण और बकाया राशि में वित्तीय राहत से संबंधित मामलों की भी जांच की जा रही है। इस संदर्भ में GMADA के लिए कंसल्टेंसी और भूमि-संग्रहण का कार्य करने वाली Tila कंसल्टेंट्स एंड कॉन्ट्रेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
ED की तलाशी और सर्वे का विस्तार
ED के अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26-27 स्थानों पर तलाशी और सर्वेक्षण किया गया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उससे संबंधित कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है। इसमें तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के अलावा रेमिगेट बिल्डएस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, MB इंफ्राबिल्ड, मेरा बाबा रियली एसोसिएट्स और मेरा बाबा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों और निदेशकों को भी शामिल किया गया है।
GMADA ऑफिस की सीलिंग
ED की टीम ने CRPF की सहायता से GMADA मुख्यालय की तीन मंजिलों को सील कर दिया है, जिसमें चीफ इंजीनियर का चैंबर भी शामिल है। कई अधिकारियों के मोबाइल फोन और कार्यालय के कंप्यूटर भी जांच के लिए जब्त किए गए हैं। ED ने कई अधिकारियों से पूछताछ की है और उनके मोबाइल से चैट रिकॉर्ड भी प्राप्त किए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, ED की ओर से तलाशी और जब्ती के परिणामों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है।
न्यू चंडीगढ़ और मोहाली भूमि मामलों की जांच
ED हाल ही में GMADA द्वारा न्यू चंडीगढ़ और मोहाली में अधिग्रहित भूमि के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह सुनिश्चित कर रही है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, निजी डेवलपर्स के लिए CLU मंजूरियों और संबंधित लेनदेन में नियमों का पालन किया गया है या नहीं। जांच में कृषि और वेस्ट लैंड को पहले से एग्रीगेट करने, बाद में मास्टर प्लान के तहत उसके उपयोग को बदलने, न्यू चंडीगढ़ में CLU और उसके बाद अधिक दरों पर अनिवार्य अधिग्रहण तथा कुछ पुराने GMADA आवंटनों पर बकाया पेनल्टी में राहत जैसे मामलों के रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
