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FCRA संशोधन बिल 2026: JPC की दूसरी बैठक 29 सितंबर को

FCRA संशोधन बिल 2026 पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की दूसरी बैठक 29 सितंबर को आयोजित की जाएगी। इस बैठक में गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय के अधिकारी प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर जानकारी देंगे। इसके बाद विशेषज्ञों और हितधारकों की राय भी सुनी जाएगी। यह बैठक विदेशी चंदे के नियमन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है। जानें इस बैठक के महत्व और प्रस्तावित संशोधन के बारे में अधिक जानकारी।
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FCRA संशोधन बिल 2026 की बैठक


FCRA संशोधन बिल 2026 समाचार: विदेशी चंदे के नियमन से संबंधित FCRA संशोधन बिल 2026 पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की दूसरी बैठक 29 सितंबर को आयोजित की जाएगी। इस बैठक में गृह मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय के अधिकारी प्रस्तावित कानून के विभिन्न प्रावधानों पर जानकारी देंगे। इसके बाद समिति विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के विचार भी सुनेगी। यह बिल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और अब इसे JPC के पास भेजा गया है।


29 सितंबर को होने वाली बैठक का विवरण

JPC की दूसरी बैठक नई दिल्ली में 29 सितंबर को होगी। इस बैठक के पहले भाग में गृह मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय के प्रतिनिधि बिल के प्रावधानों पर क्लॉज-बाय-क्लॉज ब्रीफिंग देंगे। इसके बाद समिति विशेषज्ञों और हितधारकों की राय सुनेगी। इस कार्यक्रम में SBI के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी और दिल्ली हाईकोर्ट के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा भी शामिल होंगे। JPC की पहली बैठक 18 सितंबर को हुई थी, जिसमें गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बिल के प्रस्तावित बदलावों और उनके पीछे के नीतिगत उद्देश्यों पर जानकारी दी थी।


विदेशी चंदे पर ध्यान केंद्रित

FCRA भारत में विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके उपयोग को नियंत्रित करता है। प्रस्तावित संशोधन बिल में विशेष रूप से उन संगठनों के विदेशी चंदे और उनसे निर्मित संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक नया ढांचा पेश किया गया है, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो गया है, या जो अपना पंजीकरण सरेंडर कर देते हैं। बिल में ऐसे मामलों में विदेशी योगदान और संबंधित संपत्तियों को एक केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित Designated Authority के अधीन रखने का प्रावधान है। कुछ परिस्थितियों में, यदि निर्धारित अवधि के भीतर नया या नवीनीकरण पंजीकरण नहीं मिलता है, तो इन संपत्तियों के स्थायी रूप से Designated Authority में निहित होने का प्रावधान भी है।


JPC की भूमिका का महत्व

JPC का कार्य बिल के प्रावधानों की गहन जांच करना, संबंधित मंत्रालयों और विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त करना, और सदस्यों के विचारों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करना है। 2026 का FCRA संशोधन बिल अभी कानून नहीं बना है, बल्कि संसदीय जांच की प्रक्रिया में है। इसलिए 29 सितंबर की बैठक में होने वाली चर्चा प्रस्तावित कानून के अंतिम स्वरूप के लिए महत्वपूर्ण होगी। समिति विशेषज्ञों और हितधारकों से मिलने वाली राय के आधार पर बिल में बदलाव की सिफारिश कर सकती है। अंतिम निर्णय संसद में विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। JPC को अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र 2026 से पहले प्रस्तुत करनी है।