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FSSAI की कार्रवाई से प्रभावित हुए प्रमुख शराब ब्रांड्स

FSSAI ने भारत में कई प्रमुख शराब ब्रांड्स की बिक्री पर रोक लगाई है, जिसमें Antiquity Blue Whisky और Old Monk शामिल हैं। यह कार्रवाई उत्पादों की जांच के दौरान फ्लेवरिंग प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण की गई है। नियामक का कहना है कि कुछ कंपनियों ने ऐसे फ्लेवर का उपयोग किया है जो मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इस निर्णय का असर भारत के बड़े शराब बाजार पर पड़ सकता है, जहां घरेलू उत्पादों की मांग अधिक है। जानें इस मामले में कंपनियों की चिंताएं और FSSAI की बढ़ती सख्ती के बारे में।
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FSSAI द्वारा शराब ब्रांड्स पर प्रतिबंध


FSSAI द्वारा शराब ब्रांड्स पर प्रतिबंध: भारत में शराब उद्योग से जुड़ी कई प्रमुख कंपनियों को एक बड़ा झटका लगा है। खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ भारतीय व्हिस्की और रम ब्रांड्स की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई उत्पादों की जांच के दौरान सामने आई फ्लेवरिंग प्रक्रिया के कारण की गई है।


FSSAI के अनुसार, कुछ कंपनियों के उत्पादों में ऐसे फ्लेवर का उपयोग पाया गया है, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। नियामक का कहना है कि शराब के स्वाद और सुगंध को बढ़ाने के लिए अपनाई गई यह प्रक्रिया मान्य नियमों से भिन्न है.


प्रभावित कंपनियों और ब्रांड्स

इस कार्रवाई का असर United Spirits, Inbrew Beverages और Mohan Rocky Springwater के कुछ उत्पादों पर पड़ा है। जिन प्रमुख ब्रांड्स पर रोक लगाई गई है, उनमें शामिल हैं:


Antiquity Blue Whisky


Royal Challenge Whisky


Bagpiper Deluxe Whisky


Old Cask Deluxe XXX Rum


Old Monk के कुछ वेरिएंट।


इनमें से कई उत्पाद भारत में लंबे समय से लोकप्रिय रहे हैं और घरेलू शराब बाजार में इनकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।


फ्लेवरिंग प्रक्रिया पर आपत्ति

FSSAI का कहना है कि शराब में प्राकृतिक फ्लेवरिंग पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन जांच में कुछ फैक्ट्रियों में ऐसे फ्लेवर पाए गए जो अलग से मिलाए गए थे। नियामक के अनुसार, सामान्य निर्माण प्रक्रिया में व्हिस्की में व्हिस्की फ्लेवर या रम में रम फ्लेवर मिलाने की कोई मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय परंपरा नहीं है।


FSSAI ने चिंता व्यक्त की है कि इस तरह की प्रक्रिया से शराब बनाने की पारंपरिक विधियों, जैसे लंबे समय तक परिपक्वता या प्राकृतिक सामग्री का उपयोग, में कमी आ सकती है।


भारत के शराब बाजार पर प्रभाव

भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में से एक है। देश में शराब उद्योग का वार्षिक कारोबार लगभग 40 अरब डॉलर के आसपास है। घरेलू स्तर पर बनने वाली व्हिस्की और रम की मांग काफी अधिक है, क्योंकि ये आयातित ब्रांड्स की तुलना में आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक किफायती होती हैं। इस कार्रवाई के बाद इन ब्रांड्स की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


कंपनियों की चिंता

शराब उद्योग से जुड़े कुछ अधिकारियों ने नियामक के फैसले पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि फ्लेवरिंग का उपयोग भारतीय नियमों के अनुसार किया जा रहा था। इसके अलावा, यह स्पष्ट नहीं है कि बिक्री रोक केवल उन्हीं फैक्ट्रियों में बने उत्पादों पर लागू होगी, जिनकी जांच हुई है, या फिर पूरे देश में इन ब्रांड्स के सभी उत्पादों पर इसका असर पड़ेगा।


FSSAI की सख्ती

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब FSSAI खाद्य और पेय पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर अपनी निगरानी बढ़ा रहा है। हाल ही में, नियामक ने कंपनियों को अधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों को 'एनर्जी ड्रिंक' के रूप में पेश करने से रोकने के निर्देश भी दिए थे। इससे स्पष्ट है कि खाद्य और पेय क्षेत्र में नियमों के पालन को लेकर जांच पहले से अधिक सख्त हो रही है।