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IOCL की पहली तिमाही में मुनाफे में गिरावट, मध्यपूर्व संघर्ष का असर

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मुनाफे में गिरावट का सामना किया है, जबकि राजस्व में वृद्धि हुई है। जून तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेट नेट लॉस 1,141.09 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 6,808.12 करोड़ रुपये के मुनाफे से काफी कम है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे मध्यपूर्व में चल रहे संघर्ष और मार्केटिंग मार्जिन में कमी ने इस स्थिति को प्रभावित किया। साथ ही, कंपनी के अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों पर भी नजर डालेंगे।
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IOCL Q1 परिणाम


IOCL Q1 परिणाम: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मुनाफे में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की है। जून तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेट नेट लॉस 1,141.09 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में इसे 6,808.12 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।


राजस्व में वृद्धि

पहली तिमाही में यह घाटा कुछ पेट्रोलियम उत्पादों के मार्केटिंग मार्जिन में कमी के कारण हुआ। हालांकि, रिफाइनिंग मार्जिन में वृद्धि ने इस घाटे को कुछ हद तक कम किया है। जून तिमाही में कंपनी का ऑपरेशन से राजस्व 27% बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2.21 लाख करोड़ रुपये था।


कंसॉलिडेट नेट लॉस और अन्य आंकड़े

कंसॉलिडेट नेट लॉस - 1,141.09 करोड़ रुपये


ऑपरेशन से राजस्व - 2.82 लाख करोड़ रुपये (27% वृद्धि)


कुल आय - 2.82 लाख करोड़ रुपये (27% वृद्धि)


कुल तेल रिफाइन - 1.9165 करोड़ टन (3% वृद्धि)


घरेलू बिक्री - 2.5252 करोड़ टन


निर्यात - 9.59 लाख टन (29% कमी)


तेल रिफाइनिंग में वृद्धि

कंपनी ने इस अवधि में कुल 1.9165 करोड़ टन तेल रिफाइन किया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 3% अधिक है। पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 1.8683 करोड़ टन था।


घरेलू बिक्री में वृद्धि

घरेलू बिक्री बढ़कर 2.5252 करोड़ टन हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2.4973 करोड़ टन थी। हालांकि, निर्यात में 29% की कमी आई और यह 9.59 लाख टन रहा।


मुआवजे की स्वीकृति

तेल मंत्रालय ने पिछले साल कंपनी को 31 मार्च, 2025 तक घरेलू LPG की बिक्री पर हुए नुकसान के लिए 14,486 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी थी।


OMC को नुकसान

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण, बेंचमार्क कीमतों में वृद्धि, प्रीमियम, लॉजिस्टिक्स लागत, रुपये की कमजोरी और रिटेल कीमतों में देरी से OMC को अप्रैल-मई में भारी नुकसान हुआ।