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ISRO को NASA का मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का निमंत्रण

NASA ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह निमंत्रण भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग का एक महत्वपूर्ण कदम है। आर्टेमिस समझौते के तहत, दोनों देश चांद पर मानव निवास के लिए स्थायी बेस स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। चंद्रयान-3 मिशन की सफलता ने भारत को चांद पर अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए चांद पर रहना और काम करना संभव होगा।
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भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह निमंत्रण 5 और 6 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में आयोजित भारत-अमेरिका सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप (CSJWG) की 9वीं बैठक के दौरान दिया गया। इस बैठक में दोनों देशों के उच्च अधिकारियों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग को और अधिक मजबूत करना था.


आर्टेमिस समझौते के तहत सहयोग

यह पहल आर्टेमिस समझौते के तहत भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को और मजबूत करने के लिए की गई है। उल्लेखनीय है कि भारत 21 जून 2023 को आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 27वां देश बना। दोनों देश पहले से ही कई अंतरिक्ष परियोजनाओं पर मिलकर काम कर रहे हैं, जिनमें NISAR मिशन भी शामिल है, जो NASA और ISRO का संयुक्त उपग्रह मिशन है.


मून बेस प्रोजेक्ट का उद्देश्य

मून बेस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य चांद पर मानव निवास के लिए एक स्थायी बेस या स्टेशन स्थापित करना है। यह स्टेशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट विकसित किया जा रहा है। पहले वैज्ञानिक चांद पर केवल कुछ घंटों या दिनों के लिए जाते थे, लेकिन इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य वहां लंबे समय तक मानव बसाना है। इससे अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर रहने, काम करने और वैज्ञानिक अनुसंधान करने में सहायता मिलेगी. चांद पर मौजूद बर्फ का उपयोग पीने के पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन के रूप में किया जा सकेगा. इसके अलावा, चांद पर कम गुरुत्वाकर्षण के कारण रॉकेट लॉन्च करना पृथ्वी की तुलना में अधिक आसान और सस्ता होगा, जिससे भविष्य में मंगल ग्रह जैसे दूर के मिशनों पर जाना संभव हो सकेगा.


भारत की भूमिका

भारत के चंद्रयान-3 मिशन ने अगस्त 2023 में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर एक नया इतिहास रचा। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर की सफल लैंडिंग ने भारत को चांद पर अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। चांद का दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां मौजूद बर्फ और अन्य संसाधन भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों में सहायक हो सकते हैं. चंद्रयान-3 से प्राप्त अनुभव अमेरिका के आगामी चांद मिशनों में भी उपयोगी हो सकता है.


भारत-अमेरिका की बढ़ती साझेदारी

यह निमंत्रण आर्टेमिस समझौते के तहत भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का एक हिस्सा है। इस समझौते का उद्देश्य चांद और उससे आगे अंतरिक्ष की सुरक्षित और शांतिपूर्ण खोज के लिए नियम स्थापित करना है। अमेरिकी दूतावास ने बताया कि NASA ने इसी सहयोग के तहत ISRO को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। दोनों देश वैज्ञानिक जानकारी और डेटा साझा करने पर भी चर्चा करेंगे, साथ ही अंतरिक्ष विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार करेंगे.