ISRO में इस्तीफों की बढ़ती संख्या, सरकार ने सख्त किए नियम
ISRO में इस्तीफों की स्थिति
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े 100 से अधिक वैज्ञानिकों ने पिछले वर्ष इस्तीफा दिया है। इसके परिणामस्वरूप, इसरो के स्पेस डिपार्टमेंट को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे से संबंधित नियमों को कड़ा करना पड़ा है। अब, इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामलों में मुख्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कई लोग संगठन छोड़ रहे हैं, लेकिन यह हर संगठन का एक सामान्य हिस्सा है।
गगनयान मिशन पर प्रभाव
14 जुलाई को जारी एक आंतरिक ज्ञापन के अनुसार, केंद्र सरकार ने इसरो के केंद्रों को निर्देश दिया है कि वे गगनयान और अन्य प्रमुख मिशनों से जुड़े ग्रुप 'A' के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोधों को स्वीकार न करें। सभी इस्तीफे और सेवानिवृत्ति के अनुरोध अब सीधे अंतरिक्ष विभाग को भेजे जाएंगे। दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल ही में कर्मचारियों की बढ़ती संख्या ने राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
यूनिट प्रमुखों के अधिकारों में बदलाव
25 नवंबर 2020 को, सरकार ने इसरो केंद्रों के निदेशकों और यूनिट प्रमुखों से ग्रुप 'A' के वैज्ञानिकों और तकनीकी स्टाफ के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे के अनुरोध स्वीकार करने का अधिकार वापस ले लिया। यह कदम राष्ट्रीय हित के मिशनों पर प्रभाव को रोकने के लिए उठाया गया है।
इस्तीफों की संख्या
हालांकि, डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस ने इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है, लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, पिछले वर्ष 100 से 120 लोगों ने इस्तीफा दिया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के 80 कर्मचारियों और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के 20 वैज्ञानिकों ने अपनी नौकरी छोड़ी है।
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
इसरो से इस्तीफा देने वाले वैज्ञानिकों के संबंध में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसरो में बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं। जैसे-जैसे कुछ लोग संगठन छोड़ते हैं, वैसे-वैसे नए लोग भी शामिल होते हैं।
