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ITBP का साहसिक मिशन: माउंट एवरेस्ट से लाएंगे शहीद पर्वतारोही का शव

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने माउंट एवरेस्ट पर 1996 में शहीद हुए पर्वतारोही का शव वापस लाने के लिए एक साहसिक मिशन शुरू किया है। इस अभियान में अनुभवी शेरपाओं की टीम 'डेथ जोन' तक पहुंचेगी, जहां ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम होता है। यह मिशन केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं है, बल्कि अपने साथी के प्रति सम्मान और कर्तव्य का प्रतीक भी है। जानें इस चुनौतीपूर्ण अभियान के बारे में और एवरेस्ट पर हुई मौतों के आंकड़ों के बारे में।
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ITBP का साहसिक मिशन: माउंट एवरेस्ट से लाएंगे शहीद पर्वतारोही का शव

माउंट एवरेस्ट की चुनौतियाँ


नई दिल्ली: माउंट एवरेस्ट, जो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है, अपनी खूबसूरती के साथ-साथ खतरनाक परिस्थितियों के लिए भी जानी जाती है। क्या आप जानते हैं कि इन बर्फीली चोटियों पर आज भी कई पर्वतारोहियों के शव पड़े हुए हैं, जिन्हें उनकी ऊंचाई और कठिनाइयों के कारण वापस नहीं लाया जा सका है? हाल ही में यह जानकारी सामने आई है कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने एक ऐसा मिशन शुरू किया है, जिसे पर्वतारोहण के इतिहास में सबसे कठिन अभियानों में से एक माना जा रहा है।


शव वापस लाने की योजना

ITBP ने लगभग तीन दशक पहले माउंट एवरेस्ट पर जान गंवाने वाले अपने एक पर्वतारोही का शव वापस लाने के लिए विशेष तैयारी की है। इसके लिए अनुभवी शेरपाओं की एक टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो 'डेथ जोन' तक पहुंचेगी, जो दुनिया के सबसे खतरनाक क्षेत्रों में से एक माना जाता है।


1996 में आए एक भयंकर बर्फीले तूफान ने कई पर्वतारोहियों की जान ले ली थी। इस हादसे में ITBP के तीन जवान भी शहीद हुए थे, जिनमें से एक का शव आज भी एवरेस्ट के उत्तरी मार्ग पर मौजूद है। यह स्थान वर्षों से पर्वतारोहियों के लिए एक पहचान बिंदु बना हुआ है। अब ITBP ने अपने साथी को सम्मानपूर्वक वापस लाने का संकल्प लिया है।


डेथ जोन की कठिनाइयाँ

समुद्र तल से 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र को 'डेथ जोन' कहा जाता है। यहां ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम होता है, जिससे शरीर सामान्य रूप से कार्य नहीं कर पाता। इसके अलावा, अत्यधिक ठंड और तेज हवाओं के बीच जीवित रहना बेहद कठिन हो जाता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना अत्यंत जोखिम भरा माना जाता है।


एवरेस्ट पर मौतों का आंकड़ा

पर्वतारोहण से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, एवरेस्ट पर अब तक 340 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा शव आज भी विभिन्न स्थानों पर पड़े हुए हैं। कई शव गहरी दरारों और खतरनाक ढलानों पर फंसे हुए हैं, जहां पहुंचना भी आसान नहीं है। ITBP का यह मिशन केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं है, बल्कि अपने साथी के प्रति सम्मान और कर्तव्य भावना का प्रतीक भी है।