NEET पेपर लीक पर सख्त कानून, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
NEET परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर पर हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सरकार अब पेपर लीक से संबंधित कानून को और अधिक सख्त बनाने की योजना बना रही है। इसके लिए मौजूदा 'पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024' में महत्वपूर्ण संशोधन किए जाएंगे। यह संशोधन सोमवार को लोकसभा में पेश किया जा सकता है।
कानून में बदलाव का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि नए कानून के तहत पेपर लीक करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी, और जांच तथा सुनवाई की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। इससे परीक्षाओं पर लोगों का विश्वास बढ़ेगा। पिछले कुछ वर्षों में कई सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है।
सजा के प्रावधानों में बदलाव
इस नए बिल में सजा के प्रावधानों को और सख्त किया गया है। यदि कोई व्यक्ति परीक्षा में धोखाधड़ी या पेपर लीक जैसे अपराध में लिप्त पाया जाता है, तो उसे कम से कम 5 साल की जेल की सजा हो सकती है, जो 10 साल तक बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। मौजूदा कानून में ऐसी स्थिति में 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर कार्रवाई
यदि किसी परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता कंपनी की भूमिका सामने आती है, तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, परीक्षा का पूरा खर्च भी उसी कंपनी से वसूला जाएगा। कंपनी को 8 साल तक किसी भी सरकारी परीक्षा से जुड़े कार्यों से बाहर रखा जाएगा। मौजूदा कानून में यह जुर्माना 1 करोड़ रुपये और प्रतिबंध 4 साल का है।
संगठित अपराध के लिए सजा
यदि पेपर लीक किसी गिरोह या संगठित अपराध के तहत किया जाता है, तो दोषियों को कम से कम 7 साल की जेल हो सकती है, जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
जांच की प्रक्रिया में तेजी
इस नए बिल में 2 नई धाराएं 12A और 12B जोड़ी गई हैं। इसके तहत केंद्र सरकार आवश्यकता पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन कर सकेगी। केंद्रीय जांच एजेंसी या स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को मामला मिलने के 2 महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। इसके अलावा, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाई जाएगी। इन अदालतों में सुनवाई रोजाना होगी।
अपील के प्रावधानों में सख्ती
इस बिल में अपील के प्रावधानों को भी सख्त किया गया है। स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की जा सकेगी, जिसमें दो जजों की बेंच सुनवाई करेगी। अपील का फैसला 3 महीने के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा। फैसले के खिलाफ 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी, लेकिन सही कारण होने पर हाई कोर्ट 30 दिन बाद भी अपील स्वीकार कर सकता है।
