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NEET पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई: मोदी सरकार ने शुरू की फास्ट-ट्रैक कोर्ट की प्रक्रिया

केंद्र सरकार ने NEET पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना की योजना बनाई है। यह कानून 21 जून 2024 से लागू होगा, जिसका उद्देश्य परीक्षा में धांधली को रोकना है। जानें इस कानून के तहत क्या प्रावधान हैं और अब तक कितने मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
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केंद्र सरकार की सख्त कार्रवाई


नई दिल्ली: NEET परीक्षा में पेपर लीक के मामले में केंद्र सरकार अब कठोर कदम उठाने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा में धांधलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है, जिसके बाद सरकार ने इस मुद्दे को मिशन मोड में लेने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की योजना भी बनाई जा रही है।


विशेष अदालतों का गठन

केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों से विशेष अदालतों के गठन का अनुरोध करेगी। इन अदालतों में NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों की नियमित सुनवाई होगी, जिससे जांच और ट्रायल में कोई देरी न हो और दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके।


कानून की प्रभावशीलता

कब से लागू होगा यह कानून


यह कानून 21 जून 2024 से पूरे देश में लागू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य पेपर लीक, नकल, सॉल्वर गैंग, और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से परीक्षा में धांधली पर कड़ी रोक लगाना है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कठोर दंड और भारी जुर्माने का प्रावधान है।




अब तक दर्ज मामले

अब तक कितने मामले हुए दर्ज


अब तक इस कानून के तहत NEET पेपर लीक से जुड़े चार मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन मामलों की सुनवाई के लिए दिल्ली, बॉम्बे, कलकत्ता और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इनमें से दो मामले बॉम्बे हाई कोर्ट के अंतर्गत आते हैं। सरकार का मानना है कि विशेष अदालतों के गठन से मामलों का त्वरित निपटारा होगा, जिससे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर छात्रों का विश्वास भी बढ़ेगा। इसके साथ ही, भविष्य में पेपर लीक और संगठित नकल जैसे मामलों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।