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NEET पेपर लीक विवाद: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

NEET पेपर लीक विवाद के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर छात्रों और विपक्षी दलों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। क्या शिक्षा मंत्री ने पहले कभी इस्तीफा दिया है? जानें भारत और विदेशों में ऐसे उदाहरणों के बारे में, जहां शिक्षा मंत्रियों ने विवादों के चलते अपने पद छोड़े या बनाए रखे।
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NEET पेपर लीक विवाद पर बढ़ती मांग


नई दिल्ली: NEET परीक्षा के पेपर लीक विवाद के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग में तेजी आ रही है। जंतर-मंतर पर छात्रों और विपक्षी दलों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। अब यह चर्चा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें जवाबदेही और राजनीतिक जिम्मेदारी भी शामिल हो गई है। इस संदर्भ में यह सवाल उठता है कि क्या शिक्षा से जुड़े विवादों में किसी शिक्षा मंत्री ने पहले कभी इस्तीफा दिया है। भारत और अन्य देशों में कई उदाहरण हैं जहां मंत्रियों ने विवादों के चलते अपने पद छोड़े हैं, जबकि कई बार सरकारों ने उन्हें बनाए रखा।


भारत में इस्तीफों के उदाहरण

भारत में 2012 में जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री पीरजादा मोहम्मद सईद ने अपने बेटे से जुड़े परीक्षा अनियमितता मामले में क्राइम ब्रांच की जांच रिपोर्ट के बाद इस्तीफा दिया था। इसी तरह, 1981 में गोवा के शिक्षा मंत्री फ्रांसिस्को सार्डिन्हा ने परीक्षा अंकों में गड़बड़ी के चलते छात्रों के विरोध के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया था।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तीफे

जर्मनी में 2013 में शिक्षा मंत्री एनेट शावन ने शोध में साहित्यिक चोरी के मामले में इस्तीफा दिया। नॉर्वे में 2024 में अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा मंत्री सैंड्रा बोर्च ने अपनी मास्टर थीसिस में नकल के आरोप स्वीकार करते हुए पद छोड़ दिया। इन दोनों मामलों में व्यक्तिगत जवाबदेही ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


हर विवाद में मंत्री का इस्तीफा नहीं

कई देशों में बड़े शिक्षा विवादों के बावजूद मंत्रियों ने इस्तीफा नहीं दिया। उदाहरण के लिए, ब्रिटेन में 2020 के ए-लेवल एल्गोरिदम विवाद के दौरान शिक्षा सचिव गैविन विलियमसन पर भारी दबाव था, लेकिन उन्होंने अपने पद को नहीं छोड़ा। इसी तरह, 2023 में स्कूल भवनों से जुड़े आरएएसी संकट के बावजूद शिक्षा सचिव गिलियन कीगन अपने पद पर बनी रहीं।


भारत में इस्तीफे की स्थिति

भारत में कई परीक्षा विवादों के दौरान शिक्षा मंत्री पद पर बने रहे। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने 2021 में स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था, जो किसी परीक्षा विवाद से संबंधित नहीं था। NEET-UG जैसे मामलों में जांच एजेंसियों और परीक्षा संस्थाओं पर कार्रवाई हुई, लेकिन मंत्री पद पर बने रहे।


इस्तीफे की स्थिति का निर्धारण

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी मंत्री का इस्तीफा केवल जनविरोध या परीक्षा विवाद से तय नहीं होता। आमतौर पर व्यक्तिगत आरोप, भ्रष्टाचार, नकल, साहित्यिक चोरी या गंभीर प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मामलों में इस्तीफे की नौबत आती है। किसी भी सरकार का अंतिम निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों, जांच की दिशा और सार्वजनिक दबाव पर निर्भर करता है।