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NHAI टोल फर्जीवाड़े की जांच में ED की बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने NHAI टोल फर्जीवाड़े के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 स्थानों पर छापे मारे। जांच में फर्जी टोल रसीदें बनाने के लिए अनधिकृत सॉफ्टवेयर के उपयोग का खुलासा हुआ है। ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस धोखाधड़ी से अर्जित धन का क्या हुआ और इसमें कौन लोग शामिल थे। यह मामला 2025 में दर्ज FIR से शुरू हुआ था, जिसमें कई राज्यों में कार्रवाई की गई है।
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NHAI टोल स्कैम की जांच


NHAI टोल स्कैम की जांच: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के टोल प्लाजा पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को महत्वपूर्ण कार्रवाई की। एजेंसी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, दिल्ली-NCR और पश्चिम बंगाल में लगभग 14 स्थानों पर एक साथ छापे मारे। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चल रही जांच का हिस्सा है। ED यह जानने की कोशिश कर रही है कि टोल वसूली में किस प्रकार की हेरफेर की गई, इसमें कौन लोग शामिल थे और इस प्रक्रिया से प्राप्त धन का क्या हुआ।


फर्जी टोल रसीद बनाने का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर का उपयोग करके फर्जी टोल रसीदें बनाई गईं। इन सॉफ्टवेयर के माध्यम से अधिकृत प्रणाली से अलग तरीके से टोल रसीदें तैयार की जाती थीं। आरोप है कि इस प्रक्रिया से वसूली गई राशि का एक हिस्सा NHAI की आधिकारिक लेखा प्रणाली में दर्ज नहीं होता था और इसे अन्य माध्यमों से डायवर्ट किया जाता था। ED अब इसी मनी ट्रेल की जांच कर रही है।


फॉरेंसिक जांच में मिले संकेत

ED अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल सिस्टम की फॉरेंसिक जांच और NHAI से प्राप्त रिकॉर्ड में भी ऐसे अनधिकृत सॉफ्टवेयर के उपयोग की पुष्टि हुई है। एजेंसी का मानना है कि इससे जांच को आगे बढ़ाने और टोल फर्जीवाड़े के तरीकों को समझने में मदद मिली है। बुधवार की तलाशी का मुख्य उद्देश्य डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाना, लाभार्थियों की पहचान करना और अपराध से अर्जित धन का पता लगाना बताया गया है।


2025 की FIR से शुरू हुई जांच

ED की वर्तमान जांच की शुरुआत 22 जनवरी 2025 को दर्ज FIR संख्या 17 से हुई थी। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब एजेंसी ने कई राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में कार्रवाई का दायरा बढ़ाया है। इस मामले की प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश में टोल संग्रह से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की गई थी। जनवरी 2025 में उत्तर प्रदेश STF ने एक टोल प्लाजा पर छापेमारी के दौरान समानांतर या काउंटरफिट सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। बाद में NHAI ने भी टोल शुल्क संग्रह में अनियमित गतिविधियों के खिलाफ कई यूजर-फी कलेक्शन एजेंसियों पर कार्रवाई की थी।


ED का फोकस पैसों के नेटवर्क पर

ताजा छापेमारी से संकेत मिलता है कि जांच अब केवल टोल प्लाजा पर तकनीकी हेरफेर तक सीमित नहीं है। ED यह पता लगाने में जुटी है कि आधिकारिक प्रणाली से बाहर रखी गई राशि किन खातों या व्यक्तियों तक पहुंची और इससे किसे आर्थिक लाभ हुआ। तलाशी के दौरान मिलने वाले कंप्यूटर, मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, बुधवार की कार्रवाई के बाद एजेंसी की ओर से बरामदगी या जब्ती को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।