Newzfatafatlogo

NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के लिए ड्रोन से भेजे गए हथियारों का खुलासा

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट में खुलासा किया है कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार ड्रोन के जरिए कश्मीर में भेजे गए थे। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव खुफिया नेटवर्क में कमी के कारण आतंकियों ने घाटी में लंबे समय तक सक्रिय रहने में सफलता पाई। चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि ड्रोन का उपयोग अब आतंक फैलाने की नई रणनीति बन गया है। जानें इस मामले में और क्या जानकारी सामने आई है।
 | 
NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के लिए ड्रोन से भेजे गए हथियारों का खुलासा

ड्रोन के जरिए भेजे गए हथियारों का खुलासा

श्रीनगर: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की चार्जशीट में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। रिपोर्ट के अनुसार, हमले में उपयोग किए गए हथियार नियंत्रण रेखा (LoC) के पार से ड्रोन के माध्यम से कश्मीर में भेजे गए थे। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। चार्जशीट में बताया गया है कि आतंकियों के लिए भेजे गए हथियार और अन्य सामग्री बारामुला के गोगल डोरा जंगल क्षेत्र में ड्रोन द्वारा गिराए गए थे। सुरक्षा घेरे को पार कर ये हथियार सीधे आतंकियों के सहयोगियों तक पहुंचे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।


मानव खुफिया तंत्र की कमजोरी

सुरक्षा विशेषज्ञों का मत: विशेषज्ञों का कहना है कि 2022 से 2024 के बीच मानव खुफिया नेटवर्क में आई कमी के कारण आतंकियों ने घाटी में लंबे समय तक सक्रिय रहने में सफलता पाई। उन्होंने स्थानीय स्तर पर घुल-मिलकर अपनी गतिविधियों को जारी रखा। सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीकी निगरानी पर अधिक ध्यान केंद्रित किया, जबकि जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र कमजोर होता गया।


ड्रोन का बढ़ता उपयोग

आतंकियों की नई रणनीति: विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तानी एजेंसियों ने आतंक फैलाने की रणनीति में बदलाव किया है। नियंत्रण रेखा पर बढ़ी चौकसी के कारण अब हथियार और नकदी पहुंचाने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। चार्जशीट में उल्लेख किया गया है कि 2024 में गोगल डोरा के जंगलों में ड्रोन के जरिए 20 चीनी पिस्टल, 15 लाख रुपये नकद और एक चीनी ड्रोन गिराया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकी पर्वतीय और शहरी क्षेत्रों से गुजरते रहे, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच गए।


स्थानीय नेटवर्क की कमी

चुनौतियों का सामना: जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि बैसरन घाटी में हमला करने से पहले आतंकी स्थानीय लोगों के बीच सामान्य नागरिकों की तरह रह रहे थे। हालांकि, मजबूत स्थानीय नेटवर्क की कमी के कारण उनकी गतिविधियों की सूचना समय पर सुरक्षाबलों तक नहीं पहुंच सकी। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले गुज्जर और बक्करवाल समुदाय पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना स्रोत होते थे। लेकिन पीर पंजाल क्षेत्र में जमीनी खुफिया नेटवर्क कमजोर होने के कारण जम्मू संभाग और आसपास के इलाकों में आतंकी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई।