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NMC के नए दिशानिर्देश: डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापनों पर सख्ती

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापनों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य मरीजों को भ्रामक और झूठे दावों से बचाना है। नए नियमों के तहत, डॉक्टर और अस्पताल खुद को नंबर 1 नहीं बता सकते और न ही 100% इलाज की गारंटी दे सकते हैं। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनियों की गलत मार्केटिंग को रोकने के लिए एक समिति बनाने का निर्देश दिया है। जानें इन नए नियमों का क्या प्रभाव पड़ेगा और आगे की योजना क्या है।
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NMC के नए नियमों का उद्देश्य

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने हाल ही में डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापनों तथा सोशल मीडिया प्रचार के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य मरीजों को भ्रामक और झूठे मेडिकल दावों से सुरक्षित रखना है। नए नियमों के अनुसार, कोई भी डॉक्टर या अस्पताल खुद को नंबर 1 नहीं कह सकता, 100% इलाज की गारंटी नहीं दे सकता, और न ही बिफोर-आफ्टर फोटो या मरीजों की समीक्षाएं प्रदर्शित कर सकता है। इसके अलावा, ऑफर या डिस्काउंट के माध्यम से मरीजों को आकर्षित करने की अनुमति नहीं होगी। ये दिशा-निर्देश सोशल मीडिया, वेबसाइट, टीवी, समाचार पत्र, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, इन्फ्लुएंसर, स्पॉन्सर्ड पोस्ट और AI द्वारा निर्मित विज्ञापनों पर भी लागू होंगे।


सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

एक अन्य मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह गलत दवा मार्केटिंग को रोकने के लिए एक कानूनी ढांचे पर विचार करे। इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा, जो ठोस सुझाव देगी। यह मामला उन कंपनियों से संबंधित है, जो डॉक्टरों को महंगे उपहार और विदेश यात्राएं देकर अपनी दवाएं लिखवाती हैं।


नए नियमों का विवरण

NMC ने 6 अक्टूबर 2026 को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो तुरंत प्रभावी हैं। इनका उद्देश्य डॉक्टरों और अस्पतालों के भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाना है। सुप्रीम कोर्ट में दवा कंपनियों की गलत मार्केटिंग के खिलाफ याचिका दायर की गई है, जिसमें आरोप है कि कंपनियां डॉक्टरों को महंगे उपहार देकर अपनी दवाएं लिखवाती हैं।


कब क्या हुआ?

  • 6 अक्टूबर 2026: NMC ने डॉक्टरों और अस्पतालों के विज्ञापनों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए।
  • 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक समिति बनाने का निर्देश दिया।
  • यह समिति दवा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग पर विचार करेगी।


NMC के नियमों का उद्देश्य

झूठे और बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे मरीजों को गुमराह कर सकते हैं। बिफोर-आफ्टर फोटो और रिव्यू देखकर मरीज डॉक्टर का चयन करते हैं। ऑफर और डिस्काउंट से मरीज ऐसे कंसल्टेशन के लिए आ सकते हैं, जिनकी उन्हें आवश्यकता नहीं है।


सुप्रीम कोर्ट में दवा कंपनियों का मामला

आरोप है कि कंपनियां डॉक्टरों को महंगे उपहार देकर अपनी दवाएं लिखवाती हैं, जिससे मरीजों को महंगी या गैर-जरूरी दवाएं मिल सकती हैं। मौजूदा नियम कमजोर हैं और कोर्ट ने इसे स्वैच्छिक बताया है।


NMC के नियमों का प्रभाव

NMC के नए नियम पूरे देश में लागू हो गए हैं और ये सभी पंजीकृत डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों पर लागू होते हैं।


नए नियमों से बदलाव

NMC के नए नियमों के तहत अब गारंटीड इलाज, बेस्ट डॉक्टर, नंबर-1 स्पेशलिस्ट जैसे दावे नहीं किए जा सकेंगे। इसके अलावा, बिफोर-आफ्टर फोटो और मरीजों की कहानियां भी प्रचार में नहीं दिखाई जा सकेंगी।


आगे की योजना

डॉक्टर और अस्पताल अब NMC के नए नियमों के अनुसार विज्ञापन कर सकेंगे। यदि कोई गलती पाई जाती है, तो राज्य मेडिकल काउंसिल नोटिस जारी करेगी।