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PM-DAKSH योजना पर कांग्रेस के आरोप और सरकारी आंकड़ों का विरोधाभास

केंद्र सरकार की PM-DAKSH योजना को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि यह योजना जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं है। जयराम रमेश ने कहा कि पिछले वर्ष इस योजना पर कोई खर्च नहीं हुआ। हालांकि, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि लाखों लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। क्या यह योजना वास्तव में युवाओं को रोजगार दिला रही है? जानें इस लेख में योजना के उद्देश्य और कांग्रेस के आरोपों का विश्लेषण।
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राजनीतिक बयानबाजी तेज

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'PM-DAKSH' योजना को लेकर राजनीतिक चर्चाएं बढ़ गई हैं। कांग्रेस पार्टी ने यह आरोप लगाया है कि यह योजना, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को रोजगार देने के लिए शुरू की गई थी, जमीनी स्तर पर सही तरीके से लागू नहीं हो रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि योजना के कार्यान्वयन में सुस्ती देखी जा रही है और यह भी कि निर्धारित बजट का पूरा लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचा है।


सरकारी आंकड़ों की स्थिति

हालांकि, सरकारी आंकड़े एक अलग कहानी बयां करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक लगभग 1.87 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और हजारों लाभार्थी रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ चुके हैं। इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि क्या प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को केवल सर्टिफिकेट मिल रहे हैं, या उन्हें स्थायी आय का साधन भी मिल रहा है?


PM-DAKSH योजना का परिचय

'प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही योजना' (PM-DAKSH) की शुरुआत वित्त वर्ष 2020-21 में हुई थी। यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित की जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य पिछड़े और वंचित वर्गों के युवाओं को निशुल्क कौशल सिखाना है, ताकि वे आसानी से नौकरी प्राप्त कर सकें या अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।


कांग्रेस के आरोप

कांग्रेस ने सरकार पर यह आरोप लगाया है कि पिछले वर्ष इस योजना पर एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया। उनका कहना है कि जब सरकार बजट निर्धारित करती है, तब भी जरूरतमंद युवाओं को समय पर प्रशिक्षण और रोजगार क्यों नहीं मिल पाता। जयराम रमेश ने कहा कि योजना का कार्य लगभग ठप रहा और आवंटित राशि का सही उपयोग नहीं हुआ। उनका तर्क है कि यदि सरकार की योजनाएं कागजों पर ही रह जाएंगी, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान बेरोजगार युवाओं को होगा।


सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण

11 मार्च 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1,87,305 लाभार्थियों को सफलतापूर्वक कौशल प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 73,102 लोग या तो नौकरी प्राप्त कर चुके हैं या अपना स्वरोजगार शुरू कर चुके हैं। सरकार का कहना है कि पिछले तीन वर्षों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए 'NSFDC' ने 72.29 करोड़ रुपये और 'NBCFDC' ने 64.01 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह प्रशिक्षण 'नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशंस फ्रेमवर्क' (NSQF) के मानकों के अनुसार दिया जाता है।


योजना की वास्तविक सफलता

किसी भी योजना की असली सफलता का आकलन केवल इस बात से नहीं किया जा सकता कि उसकी घोषणा कब हुई या कागजों पर कितना बजट है। असली सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कितने लोगों को वास्तव में रोजगार और नियमित आय का साधन मिला। यदि प्रशासनिक ढिलाई के कारण योजना की गति धीमी होती है, तो यह जनता के पैसे और युवाओं के समय दोनों का नुकसान है।