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RBI का नया नियम: साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए बैंक खातों पर लगेगा डेबिट होल्ड

भारतीय रिजर्व बैंक ने साइबर फ्रॉड और मनी म्यूल खातों पर नियंत्रण पाने के लिए नए नियमों का मसौदा तैयार किया है। इन नियमों के तहत, संदिग्ध लेन-देन पर डेबिट होल्ड लगाया जाएगा, जिससे ठगी की रकम की निकासी पर रोक लगेगी। ग्राहकों को अपने लेन-देन की वैधता साबित करने के लिए 20 दिन का समय मिलेगा। यदि बैंक को साइबर अपराध का संदेह होता है, तो मामला पुलिस को सौंपा जाएगा। यह नया ढांचा 2027 से लागू होगा, जिससे आम जनता को साइबर ठगी से सुरक्षा मिलेगी।
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साइबर फ्रॉड पर काबू पाने के लिए RBI का कड़ा कदम

मुंबई: देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड और मनी म्यूल खातों के मामलों को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों में संदिग्ध या फर्जी लेन-देन को तुरंत रोकने के लिए नए नियमों का मसौदा तैयार किया है। इसके तहत, यदि किसी बैंक खाते में संदिग्ध गतिविधि या साइबर ठगी से संबंधित राशि आती है, तो बैंक उस राशि की निकासी पर तुरंत अस्थायी रोक, जिसे 'डेबिट होल्ड' कहा जाएगा, लगा सकेगा। यह उपाय ठगी की रकम को तुरंत निकालने या अन्य खातों में स्थानांतरित करने से रोकने में सहायक होगा।


₹1,000 या उससे अधिक के संदिग्ध लेन-देन पर नजर

आरबीआई के प्रस्तावित दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि बैंक के ऑटोमेटेड या एआई-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को ₹1,000 या उससे अधिक का कोई लेन-देन संदिग्ध लगता है, तो बैंक उस राशि पर डेबिट होल्ड लगा देगा। इस कार्रवाई की तुरंत सूचना खाताधारक को डिजिटल या अन्य माध्यम से दी जाएगी। साथ ही, ग्राहक से पूछा जाएगा कि यह राशि खाते में किस स्रोत से आई है। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, ग्राहक उस राशि को न तो एटीएम या शाखा से निकाल सकेगा और न ही किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर पाएगा।


स्पष्टीकरण के लिए 20 दिन, बैंक को 10 दिन में निर्णय लेना होगा

ड्राफ्ट नियमों में ग्राहकों के अधिकारों का ध्यान रखा गया है ताकि किसी वैध खाताधारक को परेशानी न हो। डेबिट होल्ड लगाए जाने के बाद ग्राहक को 20 दिनों का समय दिया जाएगा ताकि वह अपने लेन-देन की वैधता साबित कर सके। ग्राहक की ओर से जवाब मिलने के बाद, बैंक को अगले 10 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी कर निर्णय लेना होगा। यदि बैंक ग्राहक के स्पष्टीकरण से संतुष्ट होता है, तो डेबिट होल्ड हटा दिया जाएगा। यदि ग्राहक 20 दिनों तक कोई जवाब नहीं देता, तो बैंक को होल्ड की तारीख से 30 दिनों के भीतर आगे की कार्रवाई करनी होगी।


ठगी की पुष्टि पर पुलिस को सौंपा जाएगा मामला

यदि जांच के दौरान बैंक को लेन-देन के पीछे गंभीर साइबर अपराध या मनी म्यूल रैकेट का संदेह होता है, तो वह मामले को संबंधित पुलिस या साइबर क्राइम जांच एजेंसी को भेज देगा। जांच एजेंसी के निर्देश मिलने पर बैंक उसी के अनुसार कार्रवाई करेगा। यदि एजेंसी से 30 दिनों के भीतर कोई विशेष आदेश नहीं आता, तो 31वें दिन यह रोक हटा दी जाएगी। आरबीआई के मसौदे के अनुसार, किसी भी खाते पर अस्थायी डेबिट होल्ड की अधिकतम अवधि 60 दिन होगी, जब तक कि किसी सक्षम प्राधिकारी ने अलग से निर्देश न दिया हो।


पूरा खाता फ्रीज करना होगा अंतिम विकल्प

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक केवल विवादित या संदिग्ध राशि पर ही रोक लगाएंगे, पूरा खाता फ्रीज करना अंतिम विकल्प होना चाहिए। यह नया ढांचा आम जनता को साइबर जालसाजों से बचाने में मदद करेगा। केंद्रीय बैंक ने इन प्रस्तावित नियमों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना बनाई है, हालांकि बैंक चाहें तो इसे अपनी सुरक्षा प्रणाली के तहत पहले भी लागू कर सकते हैं।