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RSS का शताब्दी समारोह: मोहन भागवत ने उठाए महत्वपूर्ण मुद्दे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने नागपुर में अपने शताब्दी वर्ष का उत्सव मनाया, जिसमें मोहन भागवत ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने स्वदेशी संस्कृति, नशे की समस्या और नई पीढ़ी की जिम्मेदारियों पर जोर दिया। भागवत ने कहा कि भारत की विविधता में एकता है और सभी को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। जानें उनके विचार और संघ की परंपराओं के बारे में।
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नागपुर में RSS का शताब्दी उत्सव


नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने शताब्दी वर्ष का जश्न विजयदशमी के अवसर पर नागपुर में मनाया। इस अवसर पर संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया और अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, जिसमें फ्रांस में हो रही हिंसा, स्वदेशी मुद्दे, नशे की समस्या और नई पीढ़ी के विषय शामिल थे। दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा को इस बार भी निभाया गया। कार्यक्रम से पहले, भागवत ने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। RSS की स्थापना 1925 में दशहरे के दिन नागपुर में हुई थी, और हर साल इस अवसर पर संघ देशभर में पथ संचलन का आयोजन करता है। यह परंपरा संघ की सांस्कृतिक विरासत और मजबूती का प्रतीक मानी जाती है।


राज नारायण बसु और संत रविदास का स्मरण

मोहन भागवत ने बंगाल के राज नारायण बसु का उल्लेख किया, जिनका जन्म 200 साल पहले हुआ था। उन्होंने बताया कि बसु ने स्वदेशी मेलों के माध्यम से लोगों को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करने के लिए हिंदू मेले की शुरुआत की थी। इसके साथ ही, भागवत ने संत रविदास के योगदान पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार, जब देश विदेशी आक्रमणों का सामना कर रहा था, तब संत रविदास ने सामाजिक समरसता और भक्ति का संदेश दिया। भागवत ने कहा कि RSS पिछले एक सदी से भारत को उसकी पहचान और संस्कृति के आधार पर संगठित करने का कार्य कर रहा है। शताब्दी वर्ष में पांच बड़े बदलावों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिनमें स्वदेशी चीजों को अपनाना शामिल है।


राजनीतिक बदलावों पर विचार

मोहन भागवत ने फ्रांस में चल रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम से एक आंधी आई है, जो सभी प्रकार की भद्रता और संस्कारों का विरोध करती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि राजनीतिक बदलाव से हालात सुधरेंगे, लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और न ही आज होगा।


उन्होंने आंदोलनों पर भी अपनी राय व्यक्त की। भागवत ने कहा कि समाज और देश को चलाना सभी की जिम्मेदारी है। अगर आंदोलन में अपनेपन की भावना हो, तो वह सकारात्मक है, लेकिन अगर उसका उद्देश्य कुछ और हो, तो वह राजनीति का साधन बन जाता है।


विविधता में एकता और नई पीढ़ी की जिम्मेदारी

संघ प्रमुख ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहां विभिन्न पंथ, प्रांत, जातियां और भाषाएं हैं। लेकिन भारत माता का स्थान सर्वोच्च है और देश को एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए। भागवत ने नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त की और कहा कि नई पीढ़ी नशीली दवाओं की आदी होती जा रही है। अभिभावकों को बच्चों को इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।


उन्होंने नई पीढ़ी में सही और गलत का फर्क समझने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भागवत ने OTT प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों पर नियम और अनुशासन के लिए सरकार से संवाद करने की बात भी की।