RSS से पारदर्शिता की मांग: कर्नाटक के गृह मंत्री का पत्र
कर्नाटक के गृह मंत्री की अपील
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से अनुरोध किया है कि वह अपना पंजीकरण कराए और अपनी कानूनी स्थिति को स्पष्ट करे। मंत्री ने संघ से उसकी आय, खर्च और संपत्तियों का विवरण साझा करने की मांग की है। उनका कहना है कि एक बड़े संगठन को देश के कानून और संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और उसे अपने कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।
पत्र में उठाए गए सवाल
RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, प्रियांक खरगे ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने संगठन के पंजीकरण, वित्तीय स्रोतों और कानूनी स्थिति के बारे में कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह पत्र अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी साझा किया है।
पंजीकरण और कानूनी स्थिति पर सवाल
प्रियांक खरगे ने कहा कि RSS का दावा है कि उसके देश-विदेश में 60,000 से अधिक शाखाएं हैं और करोड़ों स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं। ऐसे में संगठन को स्पष्ट करना चाहिए कि वह किस कानूनी ढांचे के तहत कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि RSS को अपने 100वें वर्ष को केवल जश्न मनाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इस अवसर पर आत्ममंथन करना चाहिए और अपनी जवाबदेही बढ़ानी चाहिए।
संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
प्रियांक खरगे ने RSS से उसके वित्तीय स्रोतों, दान, आमदनी-खर्च और संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी पूछा कि जब अन्य गैर-सरकारी संगठन और कंपनियां कानून के तहत पंजीकरण और जानकारी देने के लिए बाध्य हैं, तो RSS को इससे छूट क्यों मिलनी चाहिए।
कर्नाटक में RSS की गतिविधियों का हवाला
प्रियांक खरगे ने कहा कि RSS की 2025-26 की कर्नाटक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडलियां संचालित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, RSS ने कर्नाटक में 2,194 सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें लगभग 19.61 लाख लोग शामिल हुए। इसके अलावा, 562 पथ संचलनों में लगभग 2.21 लाख लोगों ने भाग लिया।
मोहन भागवत से औपचारिक जवाब की मांग
प्रियांक खरगे ने अपने पत्र में यह भी पूछा कि RSS की गतिविधियां बिना औपचारिक पंजीकरण के किस कानूनी आधार पर संचालित हो रही हैं। उन्होंने यह जानने की इच्छा जताई कि क्या संगठन सभी लागू टैक्स का भुगतान कर रहा है। उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत से इन सवालों का औपचारिक उत्तर देने का अनुरोध किया है। इस पत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
