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SBI का नया UPI-आधारित लोन सिस्टम छोटे व्यापारियों के लिए क्रांतिकारी

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने छोटे व्यवसायों के लिए एक नई UPI-आधारित लोन प्रणाली की शुरुआत की है, जो बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन वाले दुकानदारों को भी लोन प्रदान करेगी। इस प्रणाली के तहत, बैंक यूपीआई लेनदेन डेटा का उपयोग करके कर्ज की पात्रता निर्धारित करेगा, जिससे छोटे व्यापारियों को वित्तीय मुख्यधारा में लाना आसान होगा। जानें इस नई पहल के बारे में और कैसे यह छोटे दुकानदारों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
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मुंबई में SBI की नई पहल

मुंबई: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने छोटे व्यवसायों और दुकानदारों को लोन प्रदान करने के लिए एक नई और अभिनव प्रणाली विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है। अब बैंक कर्ज की पात्रता निर्धारित करने के लिए यूपीआई (UPI) लेनदेन डेटा का उपयोग करेगा। SBI के प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार तिवारी ने बताया कि यह डिजिटल असेसमेंट मॉडल उन व्यापारियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगा, जिनके पास जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं है।


जीएसटी रहित दुकानदारों को मिलेगा बड़ा सहारा

तिवारी के अनुसार, यह योजना उन छोटे व्यापारियों और विक्रेताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिनकी बिक्री नियमित होती है और ग्राहक उन्हें यूपीआई के माध्यम से भुगतान करते हैं। बैंक इन डिजिटल लेनदेन को संबंधित कारोबारी की वास्तविक बिक्री और टर्नओवर का विश्वसनीय मापदंड मानता है। इस डेटा के विश्लेषण के आधार पर, SBI एक विशेष यूपीआई-आधारित क्रेडिट समाधान विकसित कर रहा है, जिससे बिना जीएसटी वाले व्यापारियों की कर्ज चुकाने की क्षमता का सटीक आकलन किया जा सकेगा।


जीएसटी रजिस्टर्ड व्यापारियों के लिए आसान लोन प्रक्रिया

एसबीआई के एमडी ने बताया कि जीएसटी रजिस्टर्ड व्यापारियों के लिए लोन प्रक्रिया को पहले ही सरल बना दिया गया है, और ऐसे ग्राहकों को केवल 10 मिनट में लोन स्वीकृत किया जा रहा है। पिछले 18 महीनों में, बैंक ने जीएसटी और पैन डेटा के आधार पर 1 लाख करोड़ रुपये के कर्ज वितरित किए हैं। हालांकि, जीएसटी नेटवर्क से बाहर के लाखों छोटे दुकानदारों को वित्तीय मुख्यधारा में लाना एक बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए बैंक अब वैकल्पिक डेटा का उपयोग कर रहा है।


सहमति आधारित डेटा मॉडल से होगी पात्रता का निर्धारण

तिवारी ने यूपीआई लेनदेन के आंकड़ों के बारे में बताया कि लोन देने वाले बैंक को हमेशा यह स्पष्ट नहीं होता कि पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है, लेकिन प्राप्तकर्ता बैंक और पेमेंट ऐप्स के पास इसका सटीक रिकॉर्ड होता है। इस चुनौती का समाधान करने के लिए, बैंक ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बाद यूपीआई पेमेंट हिस्ट्री और दूरसंचार कंपनियों से मिलने वाले एनालिटिक्स का उपयोग करेगा।


डिजिटल रिकॉर्ड वाले दुकानदारों के लिए आसान होगा लोन प्राप्त करना

इस डेटा-संचालित मॉडल के लागू होने से उन छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से कर्ज प्राप्त करना आसान हो जाएगा, जिनका डिजिटल रिकॉर्ड मजबूत है लेकिन कागजी औपचारिकताएं सीमित हैं।