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एंबुलेंस चालक से इसरो के टेक्नीशियन तक, देवजीत भद्र ने मेहनत के दम पर पाई सफलता

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एंबुलेंस चालक से इसरो के टेक्नीशियन तक, देवजीत भद्र ने मेहनत के दम पर पाई सफलता


एंबुलेंस चालक से इसरो के टेक्नीशियन तक, देवजीत भद्र ने मेहनत के दम पर पाई सफलता


नदिया, 24 अगस्त (हि.स.)। दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत इंसान को किसी भी मुकाम तक पहुंचा सकती है। नदिया जिले के गांगनापुर निवासी देवजीत भद्र ने इसका जीवंत उदाहरण पेश किया है। शक्तिनगर जिला अस्पताल में सरकारी एंबुलेंस चालक के रूप में काम करने वाले देवजीत भद्र अब सीधे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो में अपनी जगह बनाने में सफल हुए हैं। वह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर में ‘टेक्नीशियन बी’ के पद पर योगदान देंगे।

देवजीत भद्र ने 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद आईटीआई की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्होंने शक्तिनगर जिला अस्पताल में सरकारी एंबुलेंस चालक के रूप में काम शुरू किया। एंबुलेंस चालक के तौर पर करीब 12 घंटे की ड्यूटी करने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं छोड़ी। ड्यूटी से मिलने वाले सीमित समय में वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते थे। इसके लिए उन्होंने यूट्यूब, विभिन्न ऑनलाइन क्लासेज और उपलब्ध अध्ययन सामग्री का सहारा लिया। कई बार असफल होने के बावजूद देवजीत ने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर आखिरकार उन्होंने सफलता हासिल की और उन्हें इसरो में टेक्नीशियन-बी के पद पर नियुक्ति मिली। अब वह श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

देवजीत की मां चायना भद्र ने बताया कि परिवार में आर्थिक कठिनाइयों का दौर होने के बावजूद उन्होंने हमेशा अपने बेटे को आगे बढ़ने की उम्मीद दी। उनके मुताबिक, बेटे की यह सफलता वर्षों की कठिनाइयों और संघर्ष का सबसे बड़ा प्रतिफल है।

पिता दीपक भद्र भी बेटे की नई जिम्मेदारी और नई यात्रा को लेकर बेहद खुश हैं। देवजीत की पत्नी प्रियंका भद्र ने भी अपने पति की उपलब्धि पर गर्व और खुशी जताई।

देवजीत भद्र की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार के लिए खुशी का पल नहीं है, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा