हमीरपुर में ऐतिहासिक तीजा मेले को भव्य रूप देने की तैयारियां पूरी, 14 सितंबर से होगा शुरु
-ऐतिहासिक तीजा महोत्सव की शोभायात्रा निकालने के लिये तैयारियां शुरू
- शोभायात्रा में उमड़ेगी लाखों लोगों की भीड़, नेशनल हाइवे में रूट का होगा डायवर्जन
हमीरपुर, 13 सितम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में 176 साल पुराने एतिहासिक तीजा महोत्सव की तैयारियां पूरी हाे गयी हैं। तीन दिवसीय तीजा महोत्सव का शुभारंभ 14 सितम्बर से होगा। इस आयाेजन काे लेकर पूरे क्षेत्र में खासा उत्साह देखने काे मिल रहा है। पूरा प्रशासनिक अमला भी सक्रिय है।
हमीरपुर जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर भरुआ सुमेरपुर कस्बे में पिछले 176 सालों से तीजा महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। पहले दिन दर्जनों नयनाभिराम देवी देवताओं की झांकियों की शोभायात्रा पूरे कस्बे में निकाली जाती हैं। कई किमी लम्बी शोभायात्रा जुलूस को देखने के लिये आसपास के जनपदों से भी लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है। यह शोभायात्रा कस्बे के श्रीकृष्ण मंदिर से वेद मंत्रों के साथ पूजन अर्चन करने के बाद निकाली जाती है। बस स्टाप से शोभायात्रा मैथिलीशरण मार्ग से होते हुये धीरे-धीरे ऐतिहासिक हरचन्दन तालाब पहुंचती है, जहां नाग नाथ की लीला का मंचन होता। कंस आदि दैत्यों की वध लीला का मंचन कर दर्शकों को सत्यनिष्ठा धर्मनिष्ठ होने का संदेश दिया जाता है। शोभायात्रा में श्रीकृष्ण का विमान, देवकी वसुदेव, भारत माता, पुस्तक विमान, शेर में सवार दुर्गा मां की मनमोहन झांकियों का जगह-जगह फूल बरसाकर स्वागत किया जाता है।
बलदाऊ, लवकुश, मत्स्यावतार, अर्जुन के मीन वेध, गरुण, राधाकृष्ण, शेष शैय्या पर विष्णु, माखन चोरी, सीताहरम के अलावा श्रीकृष्ण का गीता उपदेश, मिसाइल के साथ सैनिक, माया मरीच और गोवर्धन पर्वत आदि झांकियां शोभायात्रा में शामिल की जाती है। तीन दिवसीय तीजा महोत्सव में रात में कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मचती है। रात में नौटंकी का आयोजन भी होता है, जिसे देखने के लिये भारी संख्या में लोग एकत्र होते है। इस बार भी एतिहासिक कार्यक्रम में चार चांद लगाने के लिये कमेटी के पदाधिकारियों ने याेजना बनाई है। कमेटी के लोगों का कहना है कि जनपद का सुमेरपुर ही ऐसा कस्बा है, जहां सैकड़ों साल पुरानी प्रथा को हर साल पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाया जाता है। इस बार भी यह कार्यक्रम सफलता के नये आयाम हासिल करेगा।
रोटीराम बाबा की हत्या से रद्द हुआ था मेलाश्रीकृष्ण लीला कमेटी के सचिव नवल किशोर दाऊ ने बताया कि बताया कि 176 साल पुराने तीजा महोत्सव के इतिहास में पहली बार वर्ष 1984 में यह महोत्सव रद्द हुआ था। यहां परम स्वामी रोटीराम बाबा की हत्या होने के कारण सैकड़ों साल पुरानी प्रथा के इस तीन दिवसीय महोत्सव को रद्द कर जगह-जगह शोकसभा की गयी थी।
भयंकर बाढ़ के दौरान भी निकली थी शोभायात्रातीजा महोत्सव के इतिहास में वर्ष 1976 में पूरा क्षेत्र बाढ़ के पानी से घिर गया था। हर जगह कीचड़ और दलदल था। उस समय ट्रैक्टरों से तीजा महोत्सव की शोभायात्रा की झांकियों को खींचकर सड़क तक लाया गया था। कीचड़ से होते हुये शोभायात्रा पूरे कस्बे में निकालकर तीन दिवसीय तीजा महोत्सव का आगाज किया गया था।
अंधेरे में बीच तालाब कालिया नाग का हुआ था वधसाहित्यकार गणेश सिंह विद्यार्थी ने बताया कि पिछले साल सुमेरपुर कस्बे में बिजली व्यवस्था धोखा दे गयी थी, तब दर्जनों देवी देवताओं की शोभायात्रा हरचन्दन तालाब पहुंची थी, जहां अंधेरा होने के बाद भी बीच तालाब में श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का वध किया था। अंधेरे में भी तालाब किनारे यह लीला देखने भारी संख्या में लोग आये थे।
थानेदार करते हैैं देवी देवताओं की झांकियों की पूजाएतिहासिक तीजा महोत्सव की शोभायात्रा सुमेरपुर कस्बे में थाने के सामने पहुंचने पर थानेदार देवी देवताओं की झांकियों की विधिवत पूजा अर्चना करते है फिर आरती करने के बाद थानेदार शोभायात्रा के पीछे-पीछे चलते हैं। तीजा महोत्सव कमेटी के मुताबिक पिछले साल सुमेरपुर के थानेदार ने देवी देवताओं की झांकियों की आरती की थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा
