(संशोधित) देवघर से वैश्विक फिनटेक तक गौरव कुमार की उड़ान, प्रधानमंत्री ने 15 मिनट तक सुना प्रेजेंटेशन
नोट – संशोधन के बाद यह रिपोर्ट दोबारा जारी की गई है। इसमें गौरव कुमार के पिता का बयान और उनकी तस्वीरे जोड़ी गई हैं।
देवघर, 09 सितंबर (हि.स.)। झारखंड के देवघर की मिट्टी से निकलकर वैश्विक फिनटेक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले कारोबारी गौरव कुमार आज देश के उभरते हुए फिनटेक उद्यमियों में प्रमुख नाम बन चुके हैं। डिजिटल तकनीक के जरिए कर्ज और क्रेडिट के पारंपरिक बाजार को नया स्वरूप देने की दिशा में उनके नेतृत्व में स्थापित यूबी ग्रुप ने वित्तीय क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। गौरव कुमार की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय उस समय जुड़ गया, जब मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2026 के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी कंपनी के कामकाज का करीब 15 मिनट तक प्रेजेंटेशन सुना।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से चयनित देश की आठ प्रमुख फिनटेक कंपनियों के संस्थापक एवं सीईओ से प्रधानमंत्री की मुलाकात के क्रम में गौरव कुमार को भी अपने कारोबार और तकनीकी नवाचारों को प्रस्तुत करने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री द्वारा करीब 15 मिनट तक प्रेजेंटेशन सुना जाना गौरव कुमार और यूबी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। देवघर जैसे छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय और वैश्विक वित्तीय तकनीक के मंच पर अपनी पहचान बनाने वाले गौरव की यह उपलब्धि स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
देवघर से शुरू हुआ सफर, पिता रहे प्रेरणा
गौरव कुमार का देवघर से गहरा पारिवारिक जुड़ाव रहा है। उनके पिता डॉ. सुधीर कुमार देवघर के जाने-माने चिकित्सकों में शामिल रहे हैं। चिकित्सा और शिक्षा के वातावरण वाले परिवार से निकलकर गौरव ने वित्तीय क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। देवघर और सारठ से जुड़े पारिवारिक रिश्तों के बीच पले-बढ़े गौरव ने आगे चलकर तकनीक को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने की दिशा में काम शुरू किया।
उनकी सफलता इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है कि उन्होंने महानगरों से निकलने वाले उद्यमियों की भीड़ से अलग छोटे शहर की पृष्ठभूमि से अपना कारोबारी सफर शुरू किया और देखते ही देखते वैश्विक फिनटेक जगत में अपनी जगह बनाई।
2020 में क्रेड ऐवेन्यू से हुई शुरुआत
गौरव कुमार के उद्यमशील सफर में वर्ष 2020 महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इसी वर्ष क्रेड ऐवेन्यू के नाम से कंपनी की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य बैंकों, एनबीएफसी, निवेशकों और कारोबारियों के बीच क्रेडिट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तकनीक के माध्यम से अधिक आसान, पारदर्शी और प्रभावी बनाना था।
कंपनी ने पारंपरिक ऋण व्यवस्था और आधुनिक डिजिटल तकनीक के बीच एक ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में काम किया, जिससे कर्ज देने और लेने की प्रक्रिया में मौजूद कई जटिलताओं को कम किया जा सके। इस मॉडल ने निवेशकों और वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों का ध्यान आकर्षित किया।
137 मिलियन डॉलर की फंडिंग और फिर यूनिकॉर्न का सफर
क्रेड ऐवेन्यू ने अपने विस्तार की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए। वर्ष 2022 में कंपनी ने 137 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई। इसके बाद कंपनी करीब 1.3 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुई।
यह उपलब्धि गौरव कुमार के कारोबारी सफर में निर्णायक मोड़ साबित हुई। एक ओर कंपनी ने फिनटेक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत की, वहीं दूसरी ओर गौरव कुमार का नाम देश के युवा और तेजी से उभरते उद्यमियों के बीच प्रमुखता से सामने आया।
इसके बाद क्रेड ऐवेन्यू का नाम बदलकर यूबी कर दिया गया। समय के साथ कंपनी का कारोबार केवल डिजिटल लेंडिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लेंडिंग, क्रेडिट एवं रिस्क, कलेक्शन, फिक्स्ड इनकम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वित्तीय तकनीक जैसे कई क्षेत्रों तक फैलता गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय की सूची में यूबी का चयन
गौरव कुमार की हालिया उपलब्धि को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जीएफएफ 2026 के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से देश की चुनिंदा आठ टॉप फिनटेक कंपनियों के संस्थापक और सीईओ को प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के लिए चुना गया। इस सूची में यूबी का शामिल होना कंपनी की बढ़ती पहचान को दर्शाता है।
मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित जियो वर्ल्ड सेंटर में 8 से 11 सितंबर तक ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। चार दिवसीय इस सम्मेलन के सातवें संस्करण का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को किया।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने चयनित फिनटेक कंपनियों के संस्थापकों और सीईओ से मुलाकात की तथा उनके कारोबार, तकनीकी नवाचार और वित्तीय क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। इसी क्रम में उन्होंने यूबी के संस्थापक सह सीईओ गौरव कुमार से मुलाकात की और करीब 15 मिनट तक कंपनी का प्रेजेंटेशन सुना।
टॉप 200 सेल्फ-मेड एंटरप्रेन्योर्स में 68वां स्थान
गौरव कुमार की कारोबारी सफलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्हें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक-हुरुन इंडिया की ओर से जारी टॉप 200 सेल्फ-मेड एंटरप्रेन्योर्स की सूची में 68वां स्थान मिला था। यह रैंकिंग कंपनियों के मूल्यांकन और बाजार पूंजीकरण के आधार पर दी गयी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यूबी का कुल बाजार मूल्यांकन करीब 13,300 करोड़ रुपये बताया गया है।
गौरव कुमार द्वारा सह-स्थापित विवृति कैपिटल ने भी इसी सूची में 83वां स्थान हासिल किया था। दोनों कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्यांकन करीब 25,000 करोड़ रुपये बताया गया था। यह उपलब्धि गौरव कुमार के वित्तीय क्षेत्र में बनाए गए कारोबारी प्रभाव को रेखांकित करती है।
छोटे शहर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
गौरव कुमार की कहानी इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि उनकी जड़ें देवघर और सारठ से जुड़ी हैं। बाभनगामा समेत क्षेत्र से जुड़े उनके पारिवारिक रिश्ते आज भी इस सफलता की कहानी को स्थानीय जुड़ाव देते हैं।
छोटे शहर और सीमित संसाधनों वाले परिवेश से निकलकर देश और दुनिया के वित्तीय तकनीक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी माना जा रहा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि उद्यमिता और तकनीकी सोच के बल पर छोटे शहरों से निकलने वाले युवा भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
कारोबार के साथ सामाजिक सरोकार भी
गौरव कुमार की पहचान केवल कारोबारी उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। वे सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय रहे हैं। एम्स देवघर में मरीजों की सुविधा के लिए उन्होंने दो बैटरी गाड़ियां दान की हैं। इसके अलावा आरके मिशन के दो छात्रों की पढ़ाई के लिए 2.70 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की है।
गौरव कुमार की उपलब्धि उनके पिता डॉ. सुधीर कुमार के लिए सिर्फ बेटे की सफलता नहीं, बल्कि पूरे देवघर के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि जिस बेटे को उन्होंने देवघर की मिट्टी में आगे बढ़ते देखा, उसका प्रधानमंत्री के सामने अपनी बात और अपना प्रेजेंटेशन रखना उनके लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण अनुभव है।
डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि गौरव ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर जिस मुकाम को हासिल किया है, वह परिवार की खुशी से कहीं बढ़कर है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि छोटे शहर और गांव से निकलने वाले युवा भी अपनी काबिलियत के बल पर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकते हैं। गौरव की सफलता भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
देवघर से मुंबई और अब वैश्विक मंच तक
गौरव कुमार की यात्रा देवघर की गलियों और पारिवारिक परिवेश से शुरू होकर मुंबई के बड़े कारोबारी मंच और वहां से वैश्विक फिनटेक जगत तक पहुंची है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उनकी कंपनी के कामकाज का करीब 15 मिनट तक प्रेजेंटेशन सुना जाना इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
आज गौरव कुमार केवल एक सफल कारोबारी के रूप में नहीं, बल्कि छोटे शहरों से निकलकर बड़े सपने देखने वाली नई पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में भी देखे जा रहे हैं। देवघर और सारठ से जुड़ी उनकी जड़ें और वैश्विक फिनटेक मंच पर उनकी मौजूदगी इस बात की मिसाल है कि प्रतिभा और उद्यमशीलता को अवसर मिले तो छोटे शहरों से निकली कहानी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उदय कुमार सिंह
