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केंद्र की सड़क परियोजनाओं से बदल रही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की कनेक्टिविटी

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जम्मू, 03 अक्टूबर (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्ग, सुरंग, सीमा सड़क और ग्रामीण संपर्क से जुड़ी कई बड़ी योजनाओं पर काम शुरू किया है। इनका उद्देश्य केवल जम्मू-कश्मीर के शहरों और कस्बों को जोड़ना ही नहीं, बल्कि दूरदराज के गांवों, सीमावर्ती क्षेत्रों और लद्दाख को ऑल-वेदर कनेक्टिविटी देना भी है। इसके लिए भारतमाला परियोजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना निधि , प्रधानमंत्री विकास पैकेज तथा बीआरओ की रणनीतिक सड़क परियोजनाओं के जरिए काम आगे बढ़ाया गया है।

जम्मू-कश्मीर में कई बड़े काम हुए पूरे

जम्मू-कश्मीर में सड़क नेटवर्क के विस्तार में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और उससे जुड़ी सुरंग परियोजनाओं की बड़ी भूमिका रही है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी टनल करीब 9 किलोमीटर लंबी है और इससे जम्मू-श्रीनगर मार्ग को हर मौसम में बेहतर कनेक्टिविटी देती है। इसी तरह बनिहाल-काजीगुंड रोड टनल भी पूरी हो चुकी है। 8.45 किलोमीटर लंबी इस ट्विन-ट्यूब सुरंग ने बनिहाल और काजीगुंड के बीच सड़क दूरी तथा यात्रा समय को कम किया है।

जेड-मोड़/सोनमर्ग टनल का निर्माण भी पूरा हो चुका है। करीब 12 किलोमीटर की इस परियोजना ने सोनमर्ग क्षेत्र को वर्षभर सड़क संपर्क देने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किया है और आगे लद्दाख जाने वाले मार्ग को भी अधिक भरोसेमंद बनाया है। यह परियोजना भारतमाला के तहत विकसित महत्वपूर्ण पहाड़ी संपर्क परियोजनाओं में शामिल है।

ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का विस्तार हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 16 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर में पीएमजीएसवाई के विभिन्न चरणों के तहत 19,875 किलोमीटर सड़कें पूरी हो चुकी हैं और 2,132 बस्तियों को सड़क संपर्क मिला है। लद्दाख में इसी अवधि तक 1,352 किलोमीटर सड़कें पूरी हो चुकी हैं और 64 बस्तियां जुड़ चुकी हैं।

अभी इन बड़े प्रोजेक्ट पर काम जारी

सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में जोजिला टनल शामिल है। जून में इसके मुख्य टनल का ब्रेकथ्रू हासिल हुआ, लेकिन पूरी परियोजना अभी निर्माणाधीन है। एनएचआईडीसीएल के अनुसार लगभग 14 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का निर्माण फरवरी, 2028 तक पूरा होना है। इसके पूरा होने के बाद श्रीनगर-कारगिल-लेह मार्ग पर वर्षभर संपर्क मजबूत होगा।

जम्मू-कश्मीर में दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे भी अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। अप्रैल में केंद्र की ओर से बताया गया था कि जम्मू-कश्मीर वाला हिस्सा तेजी से निर्माणाधीन है और विजयपुर तक खोलने की तैयारी है, जबकि कटरा तक शेष हिस्सा पूरा किया जाना बाकी है। जून की रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में करीब 143 किलोमीटर हिस्से को अगस्त 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था।

इसके अलावा जम्मू-अखनूर मार्ग, अखनूर-पुंछ दिशा, एनएच-244 के विभिन्न हिस्से, किश्तवाड़ बाईपास और ठाठरी-न्यू दैरा/न्यू ठाठरी क्षेत्र के सड़क उन्नयन जैसे काम भी अलग-अलग चरणों में चल रहे हैं। एनएचआईडीसीएल की मौजूदा स्थिति में किश्तवाड़ बाईपास और एनएच-244 के एक प्रमुख पैकेज का काम अभी निर्माणाधीन है।

लद्दाख में सड़क नेटवर्क की अलग रणनीति

लद्दाख में सड़क विकास का बड़ा हिस्सा विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से किया जा रहा है। मार्च, 2024 में बीआरओ ने निम्मू-पदम-दरचा सड़क को जोड़कर मनाली से लेह के लिए तीसरा सड़क मार्ग तैयार किया। हालांकि, इसे पूरी तरह ऑल-वेदर बनाने के लिए शिंकुन ला टनल जैसी परियोजनाओं पर आगे काम जारी है।

दिसंबर, 2025 में बीआरओ की 125 सीमा अवसंरचना परियोजनाएं देश को समर्पित की गईं, जिनमें 28 सड़कें और 93 पुल शामिल थे। लद्दाख में श्योंक टनल जैसी परियोजनाएं भी पूरी हुईं जिससे दूरस्थ और रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच मजबूत हुई।

लद्दाख में पीएमजीएसवाई के तहत भी बड़ा काम हुआ है। जनवरी की समीक्षा में बताया गया कि पीएमजीएसवाई-1 से 2 के तहत स्वीकृत 196 योजनाओं में से 137 पूरी हो चुकी थीं। पीएमजीएसवाई -4 के तहत अब बिना सड़क संपर्क वाली बस्तियों को जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं सीआरआईएफ के तहत लगभग 2,896 करोड़ रुपये के सड़क और पुल प्रोजेक्ट भी निष्पादन में हैं।

आगे की तस्वीर:

कुल मिलाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सड़क विकास अब केवल चार लेन सड़क बनाने तक सीमित नहीं है। टनल, बाईपास, एक्सप्रेसवे, सीमा सड़क, ग्रामीण सड़क और पुल इन सभी को एक साथ विकसित किया जा रहा है। जुलाई के केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में सीमा क्षेत्रों की कनेक्टिविटी के लिए जम्मू-कश्मीर में 355 किलोमीटर और लद्दाख में 27 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं अवार्ड हुईं, जिनमें क्रमशः 172 और 14 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है।

इससे साफ है कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी होकर सड़क नेटवर्क को मजबूत कर चुकी हैं जबकि जोजिला टनल, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, किश्तवाड़ बाईपास, एचएच-244 के पैकेज और लद्दाख के कई पीएमजीएसवाई सीआरआईएफ प्रोजेक्ट अभी अगले चरण में हैं।

उत्तर कश्मीर में सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कुपवारा और बारामूला जिलों को बेहतर तरीके से जोड़ने वाली करीब 50 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना का उद्देश्य दोनों जिलों के बीच आवागमन को सुगम बनाने के साथ-साथ किसानों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों के लिए परिवहन सुविधाओं में सुधार करना है।

परियोजना के तहत दुर्सू से ज़ैंगैर तक के महत्वपूर्ण मार्ग को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मौजूदा सड़क की स्थिति के कारण इस मार्ग पर यात्रियों और मालवाहक वाहनों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रस्तावित कार्यों में सड़क को चौड़ा करना और मजबूत डामर की नई सतह तैयार करना शामिल है। इससे वाहनों की आवाजाही अधिक सुचारु होने की उम्मीद है।

बारामूला उत्तर कश्मीर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में शामिल है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों के बीच बेहतर सड़क संपर्क स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बेहतर सड़क बनने से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है। खासकर सेब और अन्य कृषि उत्पादों के परिवहन में समय कम होने से खराब होने वाले माल के नुकसान को घटाने में मदद मिल सकती है। वहीं, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए भी बेहतर सड़क का अर्थ ईंधन और यात्रा समय में संभावित बचत हो सकता है।

स्थानीय स्तर पर यह परियोजना छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और माल ढुलाई से जुड़े लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। दोनों जिलों के बीच संपर्क मजबूत होने से बाजारों तक पहुंच और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा

उत्तर कश्मीर में सोपोर और हंदवारा जैसे क्षेत्रों में भी बेहतर कनेक्टिविटी के कारण भविष्य में संपत्ति बाजार में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

सड़क परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रियों, किसानों, व्यापारियों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।

करीब 50 करोड़ रुपये का यह निवेश क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, बर्फबारी, भूमि अधिग्रहण और छोटे निर्माण मौसम के कारण इन क्षेत्रों में परियोजनाओं की गति मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीवाई) ग्रामीण सड़कों के विकास की मुख्य पहल है जो पूरे जम्मू-कश्मीर में कनेक्टिविटी को बेहतर बना रही है। जम्मू-कश्मीर में सड़क परियोजना (पीएमजीएसवाई-चार) के तहत जम्मू-कश्मीर में 7,790 करोड़ की अनुमानित लागत से 3,381 किलोमीटर लंबी 646 नई ग्रामीण सड़कें बनाई जा रही हैं।

हाल की मंज़ूरी: केंद्र सरकार ने शुरुआती बैच में 4,224 करोड़ से ज़्यादा की लागत वाली 316 सड़क परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है ताकि सैकड़ों अलग-थलग बस्तियों को जोड़ा जा सके।

2026–27 का लक्ष्य: ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 1,084 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण या अपग्रेडेशन, 44 पुलों के निर्माण और 227 बस्तियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, शहरी और ज़िलों के बीच ट्रैफ़िक को आसान बनाने के लिए 10,637 करोड़ की लागत वाली 19 बड़ी नेशनल हाईवे परियोजनाओं (जिनमें पीर की गली और साधना सुरंगें शामिल हैं) को मंज़ूरी दी है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने माना है कि अच्छी क्वालिटी वाली सड़क कनेक्टिविटी सामाजिक-आर्थिक विकास की रीढ़ है। उन्होंने कहा है कि अच्छी सड़कें आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाती हैं और इलाकों को सर्वांगीण विकास के लिए सुलभ बनाती हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की बड़ी उपलब्धियों की तारीफ़ की है। अब्दुल्ला ने दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, जम्मू और श्रीनगर रिंग रोड, एनएच-44 और इनके जैसी कनेक्टिविटी की तारीफ़ की है।

अब्दुल्ला ने मुगल रोड पर टनल प्रोजेक्ट की मंज़ूरी को एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा है कि जम्मू और कश्मीर डिवीजनों के बीच साल भर भरोसेमंद कनेक्टिविटी स्थापित करने में इसका अहम रणनीतिक और व्यावसायिक महत्व है। उन्होंने 10,600 करोड़ की लागत वाले 19 बड़े सड़क और टनल प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी देने के लिए केंद्र सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद किया है। इनमें चार-लेन वाला मगम फ्लाईओवर और काज़ीगुंड बाईपास शामिल हैं, जिन्हें उन्होंने क्षेत्रीय प्रगति के लिए एक बड़ी छलांग बताया है।-------------------------

हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह