सिकंदराबाद के ऐतिहासिक उज्जैनी महाकाली मंदिर में प्रसिद्ध 'लश्कर बोनालू' शुरु, पहले दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हैदराबाद, 02 अगस्त (हि.स.)। लोकप्रिय लश्कर बोनालू यानी प्रसिद्ध लाेक उत्सव रविवार को तेलंगाना के सिकंदराबाद के उज्जैनी महाकाली मंदिर में शुरू हुआ, जहाँ सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त और विशेष रूप से महिला भक्त मंदिर में उमड़ पड़े। यह उत्सव पूरे
आषाढ़ मास तक अलग अलग मंदिराें में मनाया जाएगा।
रविवार सुबह से ही मंदिर परिसर में बहुत अधिक भीड़ रही, क्योंकि भक्तों ने अपनी प्रार्थनाएँ और बोनम (देवी मां काे चढ़ाया जाने वाला पवित्र प्रसाद) अर्पित किए। मंदिर के मुख्य गर्भगृह तक जाने वाली सभी छह कतारें महिला भक्तों से खचाखच भरी हुई थीं।
कतारों में लगे श्रद्धालुओं काे दो से तीन घंटे से अधिक समय तक अपनी धारी का इंतजार करना पड़ रहा है। मंदिर परिसर में पारंपरिक लय के साथ पोथाराजू और शिवसत्तुलु के नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिससे एक आध्यात्मिक माहौल बन गया। पुलिस और मंदिर के अधिकारी कतारों को व्यवस्थित कर रहे हैं।
मंदिर में वीआईपी लोगों के लिए अलग से कतारों की व्यवस्था की गई है। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी. सी. सज्जनार और उनके परिवार के सदस्यों ने मंदिर पहुँचकर देवी उज्जैनी महाकाली को बोनम अर्पित किया।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव ने रविवार को बोनालू उत्सव के अवसर पर सिकंदराबाद के उज्जैनी महाकाली मंदिर में पूजा-अर्चना की। उनके साथ बीआरएस़एलपी के उप नेता तलसानी श्रीनिवास यादव, पूर्व मंत्री एवं विधायक जी. जगदीश रेड्डी और अंबरपेट के विधायक कालेरू वेंकटेश भी मौजूद थे।
इस अवसर पर रामा राव ने कहा कि हैदराबाद और सिकंदराबाद के लोग पूरी भक्ति के साथ बोनालू मना रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि बीआरएस सरकार ने बोनालू को आधिकारिक राजकीय उत्सव घोषित किया था और मंदिर समितियों को धन आवंटित किया था। उन्होंने कहा कि बीआरएस सरकार ने 1,800 करोड़ रुपये की लागत से यादद्री में श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर का विकास किया। उन्होंने अच्छी बारिश और किसानों की समृद्धि के लिए भी देवी से प्रार्थना की।
क्या हाेता है बाेनालू?
लश्कर बोनालू का मतलब सिकंदराबाद शहर में मनाए जाने वाले पारंपरिक बोनालू त्योहार से है। तेलंगाना के इस प्रसिद्ध लोक उत्सव को विशेष रूप से सिकंदराबाद के ऐतिहासिक श्री उज्जैनी महाकाली मंदिर में मनाया जाता है, तो इसे 'लश्कर बोनालू' कहा जाता है।
बोनालू शब्द तेलुगु के 'बोनम' से बना है। यह संस्कृत के 'भोजनम' शब्द से आया है। इसका सीधा मतलब देवी माँ को चढ़ाया जाने वाला भोजन या पवित्र प्रसाद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj
