Newzfatafatlogo

मोदी सरकार की दोहरी टेक क्रांति : भारत की नजर ₹40 लाख करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग बूम पर

 | 
मोदी सरकार की दोहरी टेक क्रांति : भारत की नजर ₹40 लाख करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग बूम पर


मोदी सरकार की दोहरी टेक क्रांति : भारत की नजर ₹40 लाख करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग बूम पर


- डॉ. मयंक चतुर्वेदी

नई दिल्ली, 16 जुलाई (हि.स.)। भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर उद्योग का नया केंद्र बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने एक साथ दो ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्हें आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जहां 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) को मंजूरी दी है, वहीं 1,27,500 करोड़ रुपये के सेमीकॉन 2.0 मिशन को भी हरी झंडी देकर स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दौड़ में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

दरअसल, इन दोनों योजनाओं का लक्ष्य देश को डिजाइन, अनुसंधान, पेटेंट, चिप निर्माण और उच्च तकनीकी विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार का अनुमान है कि केवल मोबाइल विनिर्माण योजना के माध्यम से अगले पांच वर्षों में लगभग 39 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन होगा, निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि होगी और 60 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। वहीं सेमीकॉन 2.0 भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करने की तैयारी है, जो भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक, सेमीकंडक्टर का निर्माण करते हैं।

सरकार की नई मोबाइल फोन विनिर्माण योजना वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इसके तहत पात्र बिक्री पर 2.25 से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। यदि कंपनियां प्रमुख कंपोनेंट देश में ही खरीदती हैं तो उन्हें 1.5 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। इतना ही नहीं, भारतीय ब्रांड विकसित करने और डिजाइन एवं अनुसंधान पर निवेश करने वाली कंपनियों को पात्र बिक्री पर अतिरिक्त 3 प्रतिशत तक प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान किया गया है।

इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी पूर्व में ही अपने भाषणों में स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत सिर्फ मोबाइल असेंबल करने वाला देश न रहे, वह भविष्य में वैश्विक स्तर के भारतीय ब्रांड और भारतीय तकनीक विकसित करे, इसके लिए केंद्र सरकार लगातार नवाचार के क्षेत्र में प्रयास कर रही है। अब यह निर्णय इसी केंद्र के इन दिशा में किए जा रहे प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।

स्मॉल इंडस्ट्री से जुड़े उद्योगपति एवं लघु उद्योग भारती के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता का कहना है कि एक दशक पहले तक भारत मोबाइल फोन आयात करने वाला देश था। आज वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है। अब सरकार का अगला लक्ष्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र सेमीकंडक्टर में भारत की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करना है। मोबाइल विनिर्माण योजना और सेमीकॉन 2.0 इसी दीर्घकालिक रणनीति के दो मजबूत स्तंभ हैं।

उन्होंनें कहा, यदि इन योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का सबसे भरोसेमंद केंद्र बनेगा। इसके अलावा भारत भविष्य में तकनीकी नवाचार, चिप डिजाइन, पेटेंट, रोजगार और निर्यात के क्षेत्र में भी विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं की कतार में मजबूती से खड़ा दिखाई देगा। यही कारण है कि उद्योग जगत इन दोनों निर्णयों को भारत के तकनीकी भविष्य को आकार देने वाले ऐतिहासिक कदम के रूप में देख रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा, “हमारी चिंता यही है कि इन दोनों योजनाओं का लाभ स्मॉल इंडस्ट्री कैसे उठा सकती है, इसके लिए सही दिशा में काम हो। हमें उम्मीद है कि इन दोनों ही योजनाओं मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) और सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण प्रणाली विकसित करने के लिए सेमीकॉन 2.0 में छोटे उद्योगों को व्यापक स्तर पर लाभ मिलेगा और हजारों नए रोजगार पैदा होंगे।”

भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने का रोडमैप

प्रख्यात उद्योगपति एवं लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय महामंत्री ओमप्रकाश गुप्ता का कहना है, मोदी सरकार ने पहली बार उत्पादन, डिजाइन और अनुसंधान को एक साथ जोड़कर नीति बनाई है। यह उद्योग को प्रोत्साहन देने की योजना होने के साथ ही भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने का रोडमैप है। इससे भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में अपने ब्रांड स्थापित कर सकेंगी और लाखों युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

गुप्ता कहते हैं, यह योजना बड़े उद्योगों के अलावा छोटे उद्योगों के लिए बहुत सफल है। मशीन टूल, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, रसायन, पैकेजिंग और इंजीनियरिंग जैसे हजारों एमएसएमई इससे जुड़ेंगे। इससे देश के लघु उद्योगों के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे और भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।

उन्होंने कहा, “मोदी सरकार की 'मेक इन इंडिया' नीति का असर आज दुनिया देख रही है। वर्ष 2014-15 की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सात गुना बढ़ चुका है, जबकि निर्यात में 11 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है और देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब यहीं बन रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनकर उभरा और उसने डीजल तथा कटे हुए हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात उत्पादों को भी पीछे छोड़ दिया।”

भारत की नीति वैश्विक निवेशकों का विश्वास बढ़ाने वाली

इस संबंध में गुजरात के उद्योगपति अनिरुद्ध शर्मा का कहना है, भारत की यह उपलब्धि वैश्विक निवेशकों का विश्वास बढ़ाने वाली है। नई योजना भारतीय कंपनियों को उत्पादन के आगे उन्हें वैश्विक ब्रांड बनने की दिशा में बढ़ाएगी। इससे भारत की निर्यात क्षमता और विदेशी मुद्रा आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मोबाइल निर्माण के साथ-साथ सरकार ने जिस निर्णय को सबसे अधिक रणनीतिक महत्व दिया है, वह है सेमीकॉन 2.0। इसके लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। सेमीकॉन 2.0 छह प्रमुख स्तंभों, चिप डिजाइन, मशीन एवं सामग्री निर्माण, नए फैब संयंत्र, एटीएमपी/ओएसएटी उद्योग, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा निर्माण पर आधारित है। सरकार का उद्देश्य भारत में पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करना है।

सेमीकॉन 1.0 की सफलता बनी नई छलांग का आधार

उल्लेखनीय है कि सरकार के पहले सेमीकंडक्टर मिशन के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। अब तक 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 12 विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें सिलिकॉन फैब, सिलिकॉन कार्बाइड फैब, माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी जैसी कंपनियां व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।

वहीं 105 स्टार्टअप चिप डिजाइन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और 315 विश्वविद्यालयों में लगभग 68 हजार छात्रों को अत्याधुनिक चिप डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। स्मॉल इंडस्ट्री के उद्योगपति जितेंद्र गुप्ता कहते हैं, दुनिया में भविष्य उसी देश का होगा जिसके पास तकनीक और सप्लाई चेन दोनों होंगी। सेमीकॉन 2.0 भारत को केवल चिप आयात करने वाला देश नहीं रहने देगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाएगा। इससे निवेश, रोजगार और निर्यात तीनों क्षेत्रों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर एआई तक, हर क्षेत्र को मिलेगा लाभ

एचएलबीएस टेक प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मितेश लोकवानी का मानना है कि सेमीकंडक्टर सिर्फ़ मोबाइल इंडस्ट्री तक ही सीमित नहीं हैं। डिफेंस, स्पेस, ऑटोमोटिव, टेलीकम्युनिकेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन, स्मार्ट मीटर, मेडिकल इक्विपमेंट और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन जैसे लगभग हर मॉडर्न सेक्टर में चिप्स अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए, सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ भारतीय इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी), चिप डिज़ाइन और रिसर्च पर भी खास ज़ोर दिया है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा सेमीकॉन 2.0 (₹1,27,500 करोड़) और मोबाइल फ़ोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (₹62,500 करोड़) को मंज़ूरी देना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। मैं इस फ़ैसले का दिल से स्वागत करता हूँ। एमपीएमएस के प्रावधान एमएसएमई सेक्टर के लिए खास तौर पर अहम हैं-इसमें मुख्य कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग पर 1.5% का अतिरिक्त इंसेंटिव और डिज़ाइन व R&D पर 3% का अतिरिक्त इंसेंटिव मिलता है। ये कदम इंडस्ट्री को सिर्फ़ असेंबली से आगे ले जाकर ज़्यादा वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग और भारतीय पेटेंट व ब्रांड बनाने की दिशा में ले जाते हैं।”

इसके साथ ही इलसिना आई प्रोडक्ट एसआईजी के चेयरमैन और एलयूबी के प्रेसिडेंट मितेश लोकवानी यह भी कहते हैं, “सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ -चिप डिज़ाइन, मशीनों, मटीरियल और केमिकल्स की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, फैब्स, एटीएमपी/ओएसटी पैकेजिंग, आएएंडडी और स्किलिंग-मध्य प्रदेश जैसे उभरते इलेक्ट्रॉनिक्स हब के लिए निवेश और रोज़गार के नए रास्ते खोलेंगे। पाँच सालों में लगभग ₹39 लाख करोड़ के प्रोडक्शन और 60,000 डायरेक्ट जॉब्स का लक्ष्य 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को और मज़बूत करेगा।”

उन्होंने कहा, अगर भारत चिप डिज़ाइन और IP क्रिएशन में ग्लोबल लीडरशिप हासिल कर लेता है, तो आने वाले सालों में यह सिर्फ़ एक मैन्युफैक्चरिंग हब से बदलकर इनोवेशन हब बन जाएगा। यही एक विकसित भारत की असली नींव बनेगी। उन्होंने बताया, “भोपाल के IT पार्क में स्थित एक वर्टिकली इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर के तौर पर, एचएलबीएस टेक और पूरी लोकल एमएसएमई इंडस्ट्री इन स्कीमों का फ़ायदा उठाने और देश की टेक्नोलॉजिकल संप्रभुता में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उद्योग जगत की वरिष्ठ प्रतिनिधि उमा शर्मा इस बारे में कहती हैं, आज तकनीकी आत्मनिर्भरता ही आर्थिक आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी शर्त बन चुकी है। मोदी सरकार के ये फैसले भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में नई पहचान देंगे और विशेष रूप से महिलाओं तथा युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ाएंगे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी