भाजपा की ‘टीम इंडिया’ में मध्य प्रदेश सबसे आगे
- राष्ट्रीय संगठन में 12.31 प्रतिशत हिस्सेदारी ने बढ़ाया एमपी का कद, चुनावी प्रदर्शन से लेकर बूथ प्रबंधन तक बना राष्ट्रीय मॉडल
भोपाल, 23 अगस्त (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में मध्य प्रदेश का बढ़ता कद अब राष्ट्रीय टीम में मिले प्रतिनिधित्व के आंकड़े बोल रहे हैं। नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में प्रदेश की उपस्थिति ने यह संकेत और मजबूत किया।
पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के लिए राज्य राष्ट्रीय संगठन की रणनीति और चुनावी प्रबंधन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति, संगठन को नई ऊर्जा देने और कार्यकर्ताओं को राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ाने के बीच मध्य प्रदेश की भूमिका विशेष रूप से रेखांकित होती दिखाई दी है।
वर्ष 2027 के शुरुआती महीनों में देश के सात राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटें राष्ट्रीय राजनीति की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसके अलावा पंजाब में 117, उत्तराखंड में 70, गोवा में 40 और मणिपुर में 60 सीटों पर चुनाव होना है। ऐसे समय में भाजपा का केंद्रीय संगठन चुनावी राज्यों के साथ-साथ अपने संगठनात्मक ढांचे को भी मजबूत करने में जुटा है।
इसी व्यापक रणनीति के बीच मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व खास तौर पर ध्यान खींचता है। भाजपा की 65 सदस्यीय केंद्रीय टीम में मध्य प्रदेश के आठ नेताओं को स्थान मिला है। यानी राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 12.31 प्रतिशत है। राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में मध्य प्रदेश की शत-प्रतिशत उपस्थिति ने भी संगठन के प्रति उसकी सक्रियता और प्रतिबद्धता को सामने रखा।
मध्य प्रदेश के प्रतिनिधित्व की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर तब सामने आती है, जब इसे देश के भौगोलिक अनुपात से जोड़कर देखा जाए। देश के 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर कुल 36 प्रशासनिक इकाइयों में मध्य प्रदेश की भौगोलिक हिस्सेदारी लगभग 2.78 प्रतिशत है। सामान्य परिस्थितियों में किसी राजनीतिक दल की राष्ट्रीय टीम में किसी राज्य का प्रतिनिधित्व उसके राजनीतिक, जनसंख्या और भौगोलिक महत्व के आसपास ही दिखाई देता है, लेकिन भाजपा की मौजूदा 65 सदस्यीय केंद्रीय टीम में मध्य प्रदेश को मिले आठ पद इस सामान्य अनुपात से कहीं आगे हैं। 12.31 प्रतिशत का यह प्रतिनिधित्व राज्य के भौगोलिक हिस्से की तुलना में 9.53 प्रतिशत अधिक है। यही अंतर मध्य प्रदेश के संगठनात्मक प्रभाव को रेखांकित करता है।
उत्तर प्रदेश से आगे निकला मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के बढ़ते संगठनात्मक कद की तुलना जब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से की जाती है तो तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो जाती है। भारतीय राजनीति में लंबे समय से यह धारणा रही है कि केंद्र की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों से होकर गुजरता है। जनसंख्या और राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश से कहीं अधिक बड़ा है। इसके बावजूद भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश को छह पद मिले हैं, जो लगभग 9.23 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के बराबर है। इसके मुकाबले मध्य प्रदेश आठ पदों के साथ 12.31 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर राष्ट्रीय संगठनात्मक प्रतिनिधित्व में आगे दिखाई देता है।
गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र भी पीछे
गुजरात को राष्ट्रीय टीम में दो पद मिले हैं, जो लगभग 3.07 प्रतिशत है। राजस्थान के चार पद लगभग 6.15 प्रतिशत और महाराष्ट्र के तीन पद लगभग 4.61 प्रतिशत प्रतिनिधित्व को दर्शाते हैं। ऐसे में आठ पदों के साथ मध्य प्रदेश इन राज्यों की तुलना में भी संगठनात्मक हिस्सेदारी के मामले में आगे खड़ा दिखाई देता है।
65 सदस्यीय केंद्रीय टीम के व्यापक परिदृश्य को देखें तो बड़ी संख्या में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व शून्य या एक पद तक सीमित है। पूर्वोत्तर के अनेक राज्य, जिनमें मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं, राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संगठनात्मक पदों पर सीमित प्रतिनिधित्व रखते हैं। इसी तरह गोवा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों की हिस्सेदारी भी अपेक्षाकृत कम है। अनेक केंद्र शासित प्रदेशों, जैसे पुडुचेरी, लक्षद्वीप, लद्दाख और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह का प्रतिनिधित्व भी इस राष्ट्रीय संगठनात्मक ढांचे में दिखाई नहीं देता। ऐसे परिदृश्य में मध्य प्रदेश के आठ पद और 12.31 प्रतिशत हिस्सेदारी उसे राष्ट्रीय टीम में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।
चुनावी प्रदर्शन बना सबसे बड़ा आधार
मध्य प्रदेश को मिले इस प्रतिनिधित्व के पीछे राज्य भाजपा का लगातार मजबूत चुनावी प्रदर्शन और उसका संगठनात्मक ढांचा भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मध्य प्रदेश भाजपा का बूथ प्रबंधन, त्रिदेव व्यवस्था और पन्ना प्रमुख मॉडल लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक प्रयोगों में प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आता रहा है। केंद्रीय नेतृत्व की दृष्टि में जिस राज्य का संगठन चुनाव के समय बूथ स्तर तक प्रभावी ढंग से सक्रिय हो और चुनावी रणनीति को जमीनी परिणाम में बदल सके, उसका राष्ट्रीय संगठन में महत्व बढ़ना स्वाभाविक है।
यही कारण है कि मध्य प्रदेश के संगठनात्मक मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व मिलना राज्य भाजपा के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह प्रतिनिधित्व दूसरे राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट संगठनात्मक संदेश देता है कि मजबूत बूथ प्रबंधन, अनुशासन, आपसी समन्वय और चुनावी परिणाम राष्ट्रीय संगठन में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी
