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मप्र में आयोजन नहीं, अब नतीजों के आंकड़ों से मापी जाएगी पोषण अभियान की सफलता

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मप्र में आयोजन नहीं, अब नतीजों के आंकड़ों से मापी जाएगी पोषण अभियान की सफलता


- 9वें राष्ट्रीय पोषण माह में आहार विविधता, प्रोटीन और ताजे भोजन पर जोर

भोपाल, 05 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में 97,882 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह की इस बार असली परीक्षा आयोजनों की संख्या नहीं, बल्कि उनके नतीजों से होगी। 9 सितंबर से शुरू हुआ 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 8 अक्टूबर तक चलेगा। अभियान का केंद्रीय संदेश “हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” है। अब जोर इस बात पर है कि पोषण संबंधी जागरूकता के साथ बच्चों और माताओं की वास्तविक पोषण स्थिति में कितना बदलाव आया है।

अभियान में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए आहार विविधता, पर्याप्त प्रोटीन, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों और ताजा पके भोजन पर जोर दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पूरक पोषण वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, शुरुआती विकास और मातृ स्वास्थ्य से जुड़े सामुदायिक केंद्र के रूप में मजबूत करने की कोशिश है।

‘आंगन मिलन सेवा’ में जांच और पोषण संवाद

राष्ट्रीय पोषण माह का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों को सिर्फ योजनाओं और पूरक पोषण के वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शुरुआती विकास और मातृ स्वास्थ्य से जुड़े सामुदायिक केंद्र के रूप में मजबूत करना है। अभियान के दौरान परिवारों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल, संतुलित भोजन और बच्चों के विकास से जुड़े व्यवहारों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश में इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए ‘आंगन मिलन सेवा’ अभियान भी 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक 97,882 आंगनबाड़ी केंद्रों पर चलाया जा रहा है। इसमें बच्चों और माताओं की स्वास्थ्य जांच, पोषण संवाद, बच्चों के लिए गतिविधियां और विभिन्न योजनाओं से जुड़े हितग्राहियों के अनुभव सामने लाने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से कम से कम एक ऐसी सफलता की कहानी सामने लाने पर भी जोर दिया गया है, जिसमें पोषण सेवाओं या किसी योजना से लाभार्थी के जीवन में आए बदलाव को दिखाया जा सके।

एम्स भोपाल के साथ समझौता, गंभीर कुपोषण के प्रबंधन पर फोकस

मध्य प्रदेश के लिए इस वर्ष के पोषण माह की एक महत्वपूर्ण पहल महिला एवं बाल विकास विभाग और एम्स भोपाल के बीच हुआ समझौता भी है। 11 सितंबर को इंदौर में राज्य स्तरीय शुभारंभ के दौरान हुए इस समझौता-ज्ञापन का उद्देश्य समुदाय आधारित तीव्र कुपोषण प्रबंधन को वैज्ञानिक, साक्ष्य आधारित और परिणामोन्मुख बनाना है। इसके तहत बच्चों में गंभीर कुपोषण की पहचान और इलाज की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

इस पहल का महत्व इसलिए भी है क्योंकि कुपोषण की पहचान के बाद बच्चे को सिर्फ सूची में दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। उसकी स्थिति के अनुसार उपचार, पोषण सहायता, फॉलोअप और दोबारा जांच की व्यवस्था भी जरूरी है। एम्स के साथ तकनीकी सहयोग से इस पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

भावनी’ पोर्टल से मदद के बाद भी निगरानी

कुपोषण से निपटने के प्रयासों में अब तकनीक और सामाजिक भागीदारी को भी जोड़ा जा रहा है। सितंबर में सामने आए ‘भावनी’ पोर्टल के जरिए सत्यापित जानकारी के आधार पर जरूरतमंद बच्चों तक सामाजिक संस्थाओं और दानदाताओं की मदद पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था की खास बात यह है कि बच्चे को सहायता मिलने के बाद उसकी स्थिति पर भी नजर रखने का प्रावधान है। सहायता की तारीख, सहायता का प्रकार और बच्चे की पोषण स्थिति जैसी जानकारी दर्ज की जाती है। समय-समय पर उसकी प्रगति अपडेट की जा सकती है। बच्चे की पहचान सार्वजनिक न हो, इसका भी प्रावधान रखा गया है।

इससे पोषण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना बनती है। सिर्फ यह दर्ज करने के बजाय कि बच्चे को मदद मिली, यह भी देखा जा सकेगा कि मदद के बाद उसकी स्थिति में कितना सुधार हुआ।

8 अक्टूबर के बाद सामने आएगी असली तस्वीर

राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान प्रदेशभर में बड़ी संख्या में गतिविधियां हो रही हैं, लेकिन असली परीक्षा अभियान पूरा होने के बाद होगी। 8 अक्टूबर के बाद विभाग के पास मौजूद आंकड़े यह बताएंगे कि कितने बच्चों और महिलाओं तक सेवाएं पहुंचीं और उनमें से कितनों की स्थिति में वास्तविक बदलाव दर्ज हुआ। आने वाले समय में कुपोषण की श्रेणी से बाहर आए बच्चों की संख्या, गंभीर कुपोषित बच्चों का उपचार और फॉलोअप, मातृ पोषण की स्थिति, स्वास्थ्य जांच तथा आंगनबाड़ी सेवाओं की नियमितता जैसे आंकड़े इस अभियान के प्रभाव को मापने के प्रमुख आधार बन सकते हैं।

यानी इस बार पोषण माह की कहानी सिर्फ आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुए आयोजनों तक सीमित नहीं रहेगी। असली कहानी तब सामने आएगी, जब अभियान की गतिविधियों के साथ उनके परिणामों के आंकड़े भी सामने होंगे- कितने बच्चों का वजन और विकास सुधरा, कितनी माताओं तक सही पोषण की जानकारी पहुंची और कितने गंभीर कुपोषित बच्चों को समय पर उपचार मिला। यही आंकड़े बताएंगे कि “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” का संदेश जमीन पर कितना असर छोड़ पाया।

पोषण की मजबूत नींव, स्वस्थ बचपन की पहचान और सशक्त भविष्य की शुरुआत

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर कहा कि पोषण केवल भोजन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि स्वस्थ बचपन, बेहतर स्वास्थ्य और सशक्त भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने बच्चों के समुचित विकास के लिए पौष्टिक एवं संतुलित आहार के साथ गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के पोषण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने प्रदेशवासियों से पोषण माह में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि हर बच्चे के स्वस्थ विकास और हर परिवार के बेहतर पोषण के लिए सरकार के प्रयासों के साथ समाज और समुदाय की सहभागिता जरूरी है।

पोषण को जनभागीदारी से जोड़ने मंत्री का जोर

मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने पोषण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि पोषण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, समुदाय और विभिन्न विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य संसाधनों के उपयोग के साथ गर्भवती और धात्री माताओं के पोषण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। इस सोच के पीछे मूल बात यह है कि बच्चे के पोषण की शुरुआत केवल आंगनबाड़ी से नहीं होती। घर में मिलने वाला भोजन, परिवार की खान-पान की आदतें, गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण, बच्चे की देखभाल और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच- सभी मिलकर बच्चे के स्वास्थ्य और विकास को प्रभावित करते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे