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आस्था के महाकुंभ से पहले संवर रही उज्जैन नगरी, सिंहस्थ 2028 में दिखेगा भव्य स्वरूप

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आस्था के महाकुंभ से पहले संवर रही उज्जैन नगरी, सिंहस्थ 2028 में दिखेगा भव्य स्वरूप


भोपाल/उज्जैन, 14 सितम्बर (हि.स.)। सिंहस्थ 2028 से पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में विकास की रफ्तार तेज हो गई है। शहर में सड़क, पुल, रेलवे, घाट, पार्किंग, जल परिवहन और डिजिटल निगरानी से लेकर महाकाल क्षेत्र तक बड़े प्रोजेक्ट आकार ले रहे हैं। लक्ष्य सिर्फ करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ संभालना नहीं, बल्कि सिंहस्थ के बाद भी उज्जैन को बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं वाला धार्मिक शहर बनाना है।

महाकाल की नगरी उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए नए स्वरूप में तैयार हो रही है। शहर के पुराने हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण से लेकर बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर, अंडरपास और नए घाटों तक कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। सरकार का फोकस श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप शहर की क्षमता बढ़ाने, यातायात को व्यवस्थित करने और आपदा प्रबंधन को मजबूत करने पर है। सिंहस्थ के लिए चल रहे विकास कार्यों में नागरिकों का स्वैच्छिक सहयोग भी मिल रहा है। कई लोगों ने अपने मकान और दुकानें तक हटाकर सड़क चौड़ीकरण में सहयोग किया है।

कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक 410 मीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसे 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। कंठाल चौराहे पर 500 वर्ग मीटर क्षेत्र में पेवर ब्लॉक लगाकर सौंदर्यीकरण होगा, जबकि प्राचीन श्री सती माता द्वार को भी नया स्वरूप दिया जाएगा। इस मार्ग पर 310 मीटर तक पीसीसी सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। स्थानीय निवासी और दुकानदार स्वेच्छा से अपने मकान-दुकान हटाकर इस काम में सहयोग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार आगामी सिंहस्थ : 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए कटिबद्ध है। सभी प्रकार के विकास कार्य और जनकल्याणकारी कार्यों को गति प्रदान की जा रही है। सम्राट विक्रमादित्य की नगरी पुन: उत्कृष्ट की ओर बढ़ रही है। नागरिकों से मिला स्वैच्छिक सहयोग भारत ही नहीं दुनिया के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

5.30 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा ट्रैफिक की लाइफलाइन

सिंहस्थ की भीड़ को देखते हुए उज्जैन में करीब 945.20 करोड़ की लागत से 5.30 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है। यह इंदौर गेट तक जाएगा। इसका उद्देश्य पुराने शहर के घने इलाकों में वाहनों का दबाव कम करना और श्रद्धालुओं के आवागमन को आसान बनाना है। महाकाल लोक के बाद काल भैरव और मंगलनाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर बढ़ी भीड़ को देखते हुए भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हरिफाटक पार्किंग एरिया से महाकाल लोक तक करीब 650 मीटर लंबा अंडरपास भी प्रस्तावित है। इसके लिए 91.74 करोड़ रुपए की प्रशासनिक मंजूरी मिली है। लगभग 450 मीटर हिस्सा भूमिगत होगा और आवाजाही के लिए दो अलग-अलग बॉक्स बनाए जाएंगे। इसका मकसद हरिफाटक ब्रिज के आसपास यातायात का दबाव कम करना और पार्किंग से महाकाल लोक तक श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना है।

शिप्रा के घाटों का विस्तार, पहली बार जल परिवहन

सिंहस्थ का सबसे बड़ा आध्यात्मिक केंद्र शिप्रा नदी है। नदी के दोनों किनारों पर 778 करोड़ की लागत से 29.15 किलोमीटर लंबे घाट विकसित किए जा रहे हैं। वहीं, 120 करोड़ की लागत से 7.8 किलोमीटर लंबे मौजूदा पक्के घाटों को भी बेहतर बनाया जा रहा है। सिंहस्थ-2016 में करीब 7 किलोमीटर घाट थे, जबकि आगामी सिंहस्थ-2028 में 35 किलोमीटर तक घाट उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है। घाटों तक पहुंच आसान बनाने के लिए 18 नई एप्रोच सड़कें प्रस्तावित हैं। इनमें गौ घाट, वेधशाला के पीछे, वाकणकर ब्रिज, जीवन खेड़ी और श्री शनि मंदिर के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा सिंहस्थ के दौरान पहली बार शिप्रा के किनारे प्रमुख मंदिरों को जल परिवहन से जोड़ने की योजना है। करीब 13.11 किलोमीटर लंबा रिवर ट्रांसपोर्ट रूट मोबिलिटी मास्टर प्लान का हिस्सा है। शिप्रा को प्रदूषण से बचाने के लिए कान्ह क्लोज्ड डक्ट डायवर्जन प्रोजेक्ट पर भी काम जारी है। हेड रेगुलेटर का काम पूरा हो चुका है। 4.50 किलोमीटर कट-एंड-कवर सेक्शन का काम पूरा हो गया है और 10.30 किलोमीटर के लिए प्रीकास्ट सेगमेंट तैयार हैं। 12 किलोमीटर के टनल सेक्शन में से 8.15 किलोमीटर खुदाई हो चुकी है। परियोजना का उद्देश्य गंदे पानी को शिप्रा में जाने से रोकना है।

रेलवे भी तैयार कर रहा बड़ा नेटवर्क

सिंहस्थ में देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए रेलवे ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार के अनुसार 125 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना है। इंदौर और आसपास के शहरों के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने पर भी जोर है। उज्जैन स्टेशन पर 6 मीटर और 12 मीटर चौड़े दो फुट ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं। दूसरी एंट्री पर करीब 15 से 20 हजार वर्गमीटर का होल्डिंग एरिया विकसित किया जा रहा है। विक्रम नगर सहित अन्य स्टेशनों पर विकास कार्य अगले 9 से 10 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है। स्टेशनों पर एआई आधारित निगरानी और बड़े पैमाने पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

सड़क नेटवर्क से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक कनेक्टिविटी

सिंहस्थ की तैयारियों का दायरा उज्जैन शहर से आगे बढ़ाकर आसपास के क्षेत्रों तक किया जा रहा है। उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए बदनावर होते हुए 80.45 किलोमीटर लंबा फोरलेन हाईवे 3,839 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। वहीं 98.73 किलोमीटर लंबे फोरलेन कॉरिडोर का भी भूमि पूजन किया गया है। इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर 48.1 किलोमीटर लंबा होगा और इसकी लागत 2,935 करोड़ रुपए है। इसके अलावा उज्जैन-इंदौर सिक्सलेन हाईवे पर 1,692 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। शहर के भीतर यातायात का दबाव कम करने के लिए करीब 700 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन बाईपास रोड की योजना भी है।

एकीकृत कंट्रोल रूम से होगी भीड़ की निगरानी

सिंहस्थ के दौरान भीड़ प्रबंधन को तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। पहली बार अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से आयोजन की निगरानी और प्रबंधन किया जाएगा। यहां रियल टाइम में भीड़ की सघनता, ट्रैफिक, आपात स्थिति और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी। पुलिस और स्वयंसेवकों को जरूरत के अनुसार अलर्ट भी भेजे जा सकेंगे। शहर के 100 प्रमुख चौराहों को कैमरों के साथ आधुनिक किया जा रहा है। मेला क्षेत्र करीब 3,100 हेक्टेयर में विकसित किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की पार्किंग के लिए 30 सेक्टरों में 3,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की योजना है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तीन-स्तरीय होल्डिंग सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है।

महाकाल मंदिर और शहर की सुविधाओं पर भी फोकस

श्री महाकालेश्वर मंदिर के विकास के लिए 299.74 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड ने सिंहस्थ से एक साल पहले सभी प्रमुख प्रोजेक्ट पूरे करने का लक्ष्य रखा है। वहीं मुख्यमंत्री ने उज्जैन से 100 किलोमीटर के दायरे में होटल, सड़क किनारे भोजनालय और अन्य सुविधाओं को भी बेहतर करने के निर्देश दिए हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार ?

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जगदीश अग्रवाल को ‘सिंहस्थ मेला प्राधिकरण’ का अध्यक्ष बनाया गया है। वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्हें शहर के विकास कार्यों, जमीनी योजनाओं और प्रशासनिक प्रोसेस को समझने की गहरी समझ है। जगदीश अग्रवाल ने कहा है कि यह पद नहीं, दायित्व है। सिंहस्थ उज्जैन के लिए महापर्व है। करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए किसी को भी दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसे प्राथमिकता मानकर पूरी निष्ठा के साथ काम करूंगा।

इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह को सिंहस्थ मेला अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। आशीष सिंह ने कहा कि सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। सभी विकास कार्यों को समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाएगा, ताकि उज्जैन और मध्य प्रदेश की वैश्विक पहचान और मजबूत हो सके।

उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि सिंहस्थ से पहले शहर की अधोसंरचना को मजबूत और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने पर भी जोर दिया जा रहा है। सभी निर्माण कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान

सिंहस्थ-2028 में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। 27 मार्च से 27 मई 2028 तक प्रस्तावित इस आयोजन को देखते हुए सरकार का लक्ष्य उज्जैन को केवल दो महीने के मेले के लिए नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। सड़क, रेल, घाट, जल परिवहन, पार्किंग और तकनीकी निगरानी से जुड़े ये प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद उज्जैन का स्वरूप बदलेगा और यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह अनुभव और भी यादगार होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत