हम न किसी के पक्ष, न किसी के विरोध में, हम सत्य के साथ
-गोविंद देव गिरि महाराज, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र कोषाध्यक्ष
भगवान श्री सीताराम प्रभु की आत्यंतिक कृपा से लगभग ५ शताब्दियों का भीषण संघर्ष पूर्ण हुआ। साधु-संत, महात्मा एवं प्रखर रामभक्तों के अनवरत प्रयास तथा बलिदानों से श्री अयोध्याधाम में श्रीरामजन्मभूमि के पवित्र स्थान पर भगवान रामलला का भव्य दिव्य मंदिर निर्मित हुआ। प्रभु की प्राण-प्रतिष्ठा हुई और ध्वजारोहण तक सभी कार्य सोत्साह संपन्न हुए। रामभक्तों के लिए यह अत्यंत आनंददायी पर्व रहा।
ऐसे मंगलमय वातावरण में इस माह में अयोध्या मंदिर में घटित अविश्वसनीय अर्थ अपहार की घटनाओं ने रामभक्तोंका हृदय विदीर्ण कर दिया। कोटि-कोटि भाविको ने अत्यंत श्रद्धापूर्वक रामलला की हुंडी में समर्पित की हुई नगद धनराशि तथा चांदी, सोने के आभूषण आदि चढ़ावे की, गिनती करते समय चोरी करने का जघन्य महापाप कुछ लोगों ने किया। चढ़ावा-चोरी का यह क्रम पिछले अनेक दिनों से चल रहा है, यह भी प्रकाश में आया। यह सभी रामभक्तों के लिए अत्यंत दुःखदायक, भीषण प्रहार रहा है। इससे हम अत्यंत आहत, दुःखी एवं लज्जित हैं। श्रीमद्भागवत की पूर्व निर्धारित कथा पूर्ण करके दिनांक ०५ जुलाई को मैं श्री अयोध्याजी पहुँच रहा हूँ। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष के रूप में मेरा यह विनम्र निवेदन सभी रामभक्तों के लिए समर्पित है-
१) कोषाध्यक्ष के दायित्व के रूप में कोष में जमा की गई राशि का आरंभ से लेकर अबतक लेखा परीक्षण (Audited) आय-व्यय का हिसाब सुरक्षित है, जो अधिकृत व्यक्तिओं द्वारा कभी भी जाँचा जा सकता है।
२) कोषाध्यक्ष के नाते आय-व्यय का हिसाब रखना मेरा कर्तव्य है। मैं निरंतर प्रवास में रहता हूँ इसलिए हमारे पुणे कार्यालय के चार्टड अकाउंटेंट सहयोगी हर महीने अंतिम ४-५ दिन अयोध्या आकर आय-व्यय की जाँच करते हैं तथा न्यास के कार्यालयीन साथियों को सहयोग एवं आवश्यक दिशा-निर्देश भी करते रहते है। उन्हीं के भरोसे मैं हिसाब के बारे में निश्चिंत रह सकता हूँ।
३) राममंदिर की ओर से किया जाने वाला व्यय सीधे बैंक से ही होता है। मैं अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हूँ। इसलिए वहाँ पर मेरे हस्ताक्षर नहीं चलते हैं। हमारे पास कोई चेकबुक नहीं है लेकिन पेमेंट कभी कैश में नहीं होते, सीधे बैंक से ही होते हैं।
४) रामभक्तों द्वारा हुंडी में समर्पित चढ़ावा जहाँ गिना जाता है उस क्षेत्र से मेरा आरंभ से ही कभी कोई संबंध नहीं रहा। मेरा निवास पुणे में है। कथाओं के निमित्त प्रवास निरंतर चलता है। चढ़ावा गिनने का कार्य प्रतिदिन का दैनिक कार्य है। उसे स्थानिक न्यासी बंधु ही आरंभ से देखते रहे हैं। उसका एसओपी (गणना प्रक्रिया के लिये संयुक्त रूप से निर्धारित दिशा-निर्देश) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर उन्होंने ही बनाया है। वह मुझे इस महीने दिखाया गया।
५) सिंधी समाज द्वारा भक्तिपूर्वक समर्पित की गई २०० किलो चांदी की २०० ईंटों की प्राप्ति, मूल्यवान धातु रजिस्टर में यथास्थान अंकित है, जिनको शुद्ध चांदी की ईंटों में ढाल कर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (अयोध्या शाखा) के लॉकर में कैसे सुरक्षित रखा गया है, इसका विवरण विश्व सिंधी सेवा संगम के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजू व्ही. मनमानीजी को दिनांक ०१ जुलाई २०२६ के पत्र से सधन्यवाद अवगत करा दिया गया है।
६) न्यासी बनने के समय से अबतक स्वयं मैंने किसी से भी कुछ नगद राशि अथवा वस्तुरूप भेंट मंदिर के लिए स्वीकार नहीं की। (इसमें २ अपवाद है- एक मेरी दिवंगत अतिवृद्ध बड़ी बहन ने रु. ११,००० रुपये दिये, दूसरे श्रीमती नीलम गो-हे जी ने चांदी की १ किलो की ईंट पुणे में प्रदान की। इन दोनों की रसीदें उन्हें तुरंत भेज दी गई थी) इसके अलावा एक भी व्यक्ति से चेक के अलावा मैंने कभी कुछ ग्रहण नहीं किया।
7) मैं लगभग हर महीने- डेढ़ महीने में न्यास के कार्यार्थ अयोध्या आता रहता हूँ। मेरे विमान अथवा अन्य प्रवास के लिए मैंने अबतक एक भी रुपया व्यय के रूप में न्यास से लिया नहीं है। प्रभु श्रीराम की निरपेक्ष सेवा के रूप में यह कार्य करने में धन्यता का अनुभव होता है।
८) चोरी कितनी हुई, कब हुई, कैसी हुई- यही तो जाँच का विषय है। यह जाँच गहराई से होनी चाहिए। जाँच एजेंसी पर भरोसा रखिए। न्यायालय अपना कार्य करेगा। एसआईटी और पुलिस पर हमें विश्वास है। दोषी बचेंगे नहीं। सभी को जाँच और न्याय-व्यवस्था का पूर्ण विश्वास करना चाहिए।
९) हम न किसी के पक्ष में हैं, न किसी के विरोध में। हम सत्य के साथ हैं। हमारा आग्रह है कि पुलिस जाँच एजेंसी से दोषी को पकड़े और उन्हें दंड दे।
१०) न्यासी अथवा कोषाध्यक्ष पद के लिये मैंने कभी कोई प्रयास नहीं किया था। प्रभु श्रीराम की सेवा किसी भी रूप में करते रहने में धन्यता एवं आनंद का अनुभव तो है ही। प्रभुकृपा से सभी का मंगल हो, यही सतत प्रार्थना है।
हमें विश्वास है भगवान श्रीराम की कृपा से सत्य शीघ्र प्रकाशित होगा। संशय के बादल छटेंगे, अपराधों का अंधकार दूर होगा, भविष्य में पूरी सतर्कता और सावधानी बरती जाएगी। हमारे रामलला का मंदिर विश्व में आदर्शतम मंदिर हो, ऐसा हमारा प्रयास रहेगा। श्रीराम भक्ति की धारा अखंड बहती रहेगी। सनातन धर्म और मंदिर की कीर्ति को धूमिल करने के प्रयास भगवान सफल नहीं होने देंगे। हमें रामराज्य लाने तक साधना करनी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश
