सावन में तातापानी के तपेश्वर धाम में उमड़ती है आस्था, एक ही परिसर में मिलते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन
- गर्म जलकुंड और प्राचीन शिव मंदिर बनाते हैं तातापानी को खास
बलरामपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। सावन मास भगवान शिव को समर्पित पवित्र महीना है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। बलरामपुर जिले का तातापानी भी सावन में शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। यहां छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। तातापानी का तपेश्वर धाम धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक रहस्य और पर्यटन के लिए भी जाना जाता है।
यहां की सबसे खास बात यह है कि एक ही परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां स्थापित की गई हैं। ऐसे श्रद्धालु जो देश के सभी ज्योतिर्लिंगों की यात्रा नहीं कर सकते, वे तातापानी में एक साथ उनके दर्शन कर सकते हैं। सावन में यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और मंदिर परिसर में भक्तों की चहल-पहल बढ़ जाती है।
तपेश्वर धाम में भगवान शिव की करीब 80 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा एक बड़े चबूतरे पर बनी है। इसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को चौड़ी सीढ़ियों से ऊपर जाना पड़ता है। प्रतिमा के दर्शन के बाद नीचे मंदिर परिसर में पहुंचा जा सकता है। मंदिर के भीतर सुंदर परिक्रमा पथ बनाया गया है। इसकी दीवारों पर भगवान शिव से जुड़ी तस्वीरें लगाई गई हैं। परिसर के एक विशाल कक्ष में 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां स्थापित हैं और प्रत्येक के सामने उसका नाम लिखा गया है।
गर्म जल के कारण पड़ा तातापानी नाम
तातापानी के नामकरण के पीछे भी रोचक तथ्य है। स्थानीय भाषा में ‘ताता’ का अर्थ गर्म होता है। यहां कई प्राकृतिक गर्म जलकुंड हैं, जिनसे लगातार गर्म पानी निकलता रहता है। कुंडों से उठती भाप और गर्म पानी श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
स्थानीय मान्यता है कि कुछ कुंडों का पानी इतना गर्म होता है कि उसमें अंडा तक उबाला जा सकता है। वैज्ञानिक दृष्टि से माना जाता है कि जमीन के नीचे सल्फर और अन्य खनिज तत्वों की मौजूदगी तथा भूगर्भीय प्रक्रिया के कारण यहां पानी गर्म होकर प्राकृतिक स्रोतों से बाहर आता है। इस प्राकृतिक रहस्य को समझने के लिए देश-विदेश के वैज्ञानिक भी तातापानी पहुंच चुके हैं।
तातापानी से भगवान राम के वनवास काल की भी मान्यता जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास के दौरान यहां ठहरे थे। कहा जाता है कि एक बार भगवान राम ने मजाक में एक कंकड़ सीता की ओर उछाला। उस समय सीता माता गर्म तेल लेकर जा रही थीं। कंकड़ कटोरे में जा गिरा और गर्म तेल के छींटे जहां-जहां पड़े, वहां से गर्म जलस्रोत निकल आए।
एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने यहां देवी-देवताओं के स्नान के लिए गर्म जलकुंड का निर्माण किया था। आज भी कुंडों से गर्म पानी और भाप निकलते देखना लोगों के लिए कौतूहल का विषय है।
तातापानी में एक प्राचीन शिव मंदिर भी है, जहां वर्षों पुरानी भगवान शिव की मूर्ति स्थापित है। स्थानीय जानकारी के अनुसार खुदाई में देवी-देवताओं की कई पुरानी मूर्तियां मिली हैं, जिन्हें मंदिर परिसर में रखा गया है। मंदिर के बाहर स्थित पुराने पेड़ पर श्रद्धालु मन्नत का नारियल बांधते हैं। सावन और महाशिवरात्रि में यहां विशेष भीड़ रहती है। वहीं मकर संक्रांति पर विशाल मेले का आयोजन होता है। मेले में झूले, मीना बाजार और विभिन्न दुकानों के कारण पूरा क्षेत्र उत्सव के रंग में रंग जाता है।
तातापानी जिला मुख्यालय बलरामपुर से करीब 12 किलोमीटर दूर है। अंबिकापुर से रामानुजगंज मार्ग पर करीब 90 किलोमीटर की दूरी तय कर तातापानी पहुंचा जा सकता है। यह स्थल राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित है। बलरामपुर में होटल और विश्राम गृह उपलब्ध हैं, जबकि तातापानी में सामुदायिक भवन में ठहरने की सुविधा है।
सावन में तातापानी का तपेश्वर धाम भगवान शिव की भक्ति, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और प्राकृतिक गर्म जलस्रोतों के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन जाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय
