तिब्बत में चीन की नीतियों को समझाती पुस्तक ‘चाइना्स कॉलोनियल गेम्स इन तिब्बत’
नव ठाकुरिया
तिब्बत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक महत्व पर केंद्रित पुस्तक ‘चाइना्स कॉलोनियल गेम्स इन तिब्बत’ वैश्विक स्तर पर तिब्बत के मुद्दे को नए सिरे से विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास करती है। वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और तिब्बत मामलों के विशेषज्ञ विजय क्रांति द्वारा संपादित इस पुस्तक का प्रकाशन वीके मीडिया ग्रुप ने सेंटर फॉर हिमालयन एशिया स्टडीज एंड एंगेजमेंट (सीएचएएसई) के लिए किया है। पूर्वोत्तर भारत के वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार नव ठाकुरिया ने पुस्तक की समीक्षा की है।
ठाकुरिया के अनुसार, 486 पृष्ठों की इस पुस्तक में तिब्बत, चीन और एशियाई भू-राजनीति से जुड़े 39 विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, राजनयिकों और रणनीतिक मामलों के जानकारों के लगभग 60 लेख संकलित किए गए हैं। यह सामग्री वर्ष 2020 से 2023 के दौरान आयोजित 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय वेबिनारों और चर्चाओं पर आधारित है। पुस्तक में तिब्बत के अलावा पूर्वी तुर्किस्तान, दक्षिणी मंगोलिया, हांगकांग और मंचूरिया जैसे क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों का भी विश्लेषण किया गया है।
विजय क्रांति के अनुसार पुस्तक का उद्देश्य तिब्बती समाज के समक्ष मौजूद राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चुनौतियों का तथ्याधारित दस्तावेज प्रस्तुत करना है। पुस्तक में मानवाधिकार, सांस्कृतिक संरक्षण, प्रशासनिक नीतियों तथा तिब्बती पहचान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है।
संकलन में भूचुंग त्सेरिंग, क्लाउड अर्पी, डेचेन पाल्मो, एथन गुटमैन, गेब्रियल लाफिटे, गेशे ल्हाकडोर, जयदेव रानाडे, जेनिफर जेंग, ल्हाडोन टेथोंग सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के लेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त प्रोफेसर समधोंग रिनपोछे, प्रोफेसर रॉबर्ट डेस्ट्रो और सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन के अध्यक्ष पेनपा त्सेरिंग के विचार भी पुस्तक को विशेष महत्व प्रदान करते हैं।
पुस्तक की भूमिका परम पावन 14वें दलाई लामा ने लिखी है। उन्होंने तिब्बती पठार के पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करते हुए इसे एशिया की प्रमुख नदियों का स्रोत और एक अरब से अधिक लोगों के जीवन से जुड़ा क्षेत्र बताया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि संवाद, सत्य और न्याय के आधार पर तिब्बत से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे प्रश्नों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।
शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, कूटनीतिज्ञों और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों के लिए यह पुस्तक तिब्बत और चीन के जटिल संबंधों को समझने वाला एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जा रही है।
(लेखक पूर्वोत्तर भारत के वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश
