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मप्र के विदिशा में जान जोखिम में डालने को मजबूर छात्र, स्टॉप डैम पर छलांगें लगाकर पहुंचते हैं स्कूल

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मप्र के विदिशा में जान जोखिम में डालने को मजबूर छात्र, स्टॉप डैम पर छलांगें लगाकर पहुंचते हैं स्कूल


- गांव में केवल आठवीं तक स्कूल, आगे की पढ़ाई के लिए उठाते हैं जोखिम

भोपाल/विदिशा, 04 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के ककरुआ गांव में स्कूली बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं। गांव में केवल आठवीं तक का स्कूल होने के कारण नौवीं के छात्रों को उफनती बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के संकरे मोहरों पर छलांग लगाकर डेढ़ किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ता है। लंबा रास्ता तय करने से बचने के लिए बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

13 किमी लंबे रास्ते से बचने के लिए शॉर्टकट

केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा के अंतर्गत आने वाले ककरुआ गांव में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की ही व्यवस्था है। कक्षा नौवीं में पढ़ने वाले करीब 9 बच्चे (जिनमें 5 छात्राएं शामिल हैं) आगे की पढ़ाई के लिए रोजाना 13 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग से बचने के लिए बेतवा नदी के स्टॉप डैम का सहारा लेते हैं। डैम पार करने पर स्कूल की दूरी घटकर मात्र डेढ़ किलोमीटर रह जाती है। बच्चे स्टॉप डैम के 10 से 12 संकरे और फिसलन भरे मोहरों पर छलांग लगाकर नदी पार करते हैं, जहां जरा सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।

दूरी के कारण पढ़ाई पर असर

मानसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने और मोहरों पर फिसलन होने से यह सफर बेहद खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे रोजाना खेतों का काम छोड़कर बच्चों को 13 किलोमीटर दूर छोड़ने नहीं जा सकते, जिससे उनके पास बच्चों को इस जोखिम में डालने या उनकी पढ़ाई छुड़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। 13 किमी दूर सड़क से आने-जाने के चक्कर में समय पर न पहुंचने के कारण कक्षा 9वीं की एक छात्रा अंतिम परीक्षा में अनुत्तीर्ण भी हो चुकी है, जिसे इस वर्ष दोबारा उसी कक्षा में पढ़ना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने की पुल निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्थायी पुल के निर्माण की गुहार लगाई है, ताकि बच्चों को जान हथेली पर रखकर स्कूल न जाना पड़े। मामला संज्ञान में आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एन.के. अहिरवार ने कहा कि उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया है। डीईओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर को लिखित में सूचित किया है और समस्या का शीघ्र स्थायी समाधान निकालने का अनुरोध किया है।

पिछले वर्ष भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

ग्राम जीवाजीपुर के सरपंच अमर सिंह ठाकुर ने बताया कि इसी तरह का एक वीडियो पिछले वर्ष भी वायरल हुआ था। उस घटना के बाद स्कूल प्राचार्य ने विद्यार्थियों को स्टॉप डैम के रास्ते नदी पार कर स्कूल आने से मना किया था। बावजूद इसके कुछ बच्चे और ग्रामीण अब भी उसी मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। सरपंच ने कहा कि अब अभिभावकों को भी समझाश देंगे, ताकि बारिश के मौसम में वे बच्चों को इस जोखिम भरे रास्ते से स्कूल न भेजें।

पुल निर्माण या स्कूल उन्नयन की उठी मांग

विदिशा एसडीएम क्षितिज शर्मा ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने स्टॉप डैम वाले रास्ते पर कंटीली झाड़ियां और तार लगाकर आवागमन रोक दिया है। इससे कई विद्यार्थियों का स्कूल पहुंचना प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों की मांग है कि स्टॉप डैम पर स्थायी पुल का निर्माण कराया जाए या फिर बंधेरा के प्राथमिक विद्यालय को उन्नत कर हाई स्कूल बनाया जाए। प्रशासन और शिक्षा विभाग ने बताया कि स्कूल के अपग्रेडेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत