पिथौरागढ़ की मानसी कापड़ी बनीं युवा उद्यमिता की नई पहचान, ऐपन कला को बनाया रोजगार
देहरादून, 16 जून (हि. स.)। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की युवा छात्रा मानसी कापड़ी ने अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के बल पर पारंपरिक ऐपन कला को उद्यमिता का सफल मॉडल बनाकर नई मिसाल पेश की है। लक्ष्मण सिंह महार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीबीए की छात्रा मानसी ने अपनी कला को केवल शौक तक सीमित न रखकर उसे व्यवसायिक स्वरूप दिया और आज वह इसके माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल रोजगार प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित उद्यमों को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं, जिससे पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल रही है।
मानसी की उद्यमिता यात्रा वर्ष 2024 में शुरू हुई, जब उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई), अहमदाबाद के सहयोग से संचालित देवभूमि उद्यमिता योजना (डीयूवाई) के द्विदिवसीय बूटकैंप में भाग लिया। इस कार्यक्रम ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि पारंपरिक कला और स्थानीय कौशल को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप व्यवसाय में कैसे बदला जा सकता है।
बचपन से ऐपन कला में रुचि रखने वाली मानसी ने बूटकैंप के दौरान अपने कार्य को एक व्यावसायिक विचार के रूप में प्रस्तुत किया। उनके नवाचारी दृष्टिकोण और प्रभावशाली प्रस्तुति के आधार पर उनका चयन 12 दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) के लिए हुआ। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने ब्रांडिंग, पैकेजिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग, ऑनलाइन बिक्री, उद्यम पंजीकरण और व्यवसाय संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
प्रशिक्षण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के बाद मानसी ने अपना उद्यम “होमीज़ वाइब्स” शुरू किया। उनके प्रयासों को फरवरी 2025 में आयोजित देवभूमि उद्यमिता स्टार्टअप मेगा इवेंट में बड़ी सफलता मिली, जब उनके उद्यम को 75 हजार रुपये का सीड फंड प्रदान किया गया। इस सहायता से उन्होंने अपने उत्पादों के विकास, विपणन और व्यवसाय विस्तार को नई गति दी।
आज मानसी प्रतिवर्ष लगभग 80 हजार रुपये मूल्य के ऐपन उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। उनका उद्यम पारंपरिक उत्तराखंडी कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का सफल उदाहरण बन चुका है। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर पहाड़ की बेटियां भी स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं।
देवभूमि उद्यमिता योजना क्या है?
सितंबर 2023 में शुरू की गई देवभूमि उद्यमिता योजना उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य युवाओं में उद्यमिता की भावना विकसित करना और उन्हें रोजगार खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले के रूप में तैयार करना है। यह पांच वर्षीय योजना ईडीआईआई अहमदाबाद के सहयोग से संचालित की जा रही है।
योजना के तहत राज्य के 119 राजकीय महाविद्यालयों और पांच विश्वविद्यालयों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि, हस्तशिल्प, पर्यटन, आयुष, एग्रो-प्रोसेसिंग, ड्रोन तकनीक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), नवीकरणीय ऊर्जा समेत 12 प्रमुख क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क और सीड फंडिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय
