पर्यटकों की पसंद बना हरिद्वार का झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व
हरिद्वार, 05 जुलाई (हि.स.)। राजाजी टाइगर रिजर्व और जिम कॉर्बेट पार्क की तर्ज पर हरिद्वार वन विभाग द्वारा संचालित झिलमिल झील संरक्षण रिज़र्व भी जंगल सफारी के लिए पर्यटकों की पसंद बनता जा रहा है। इस सीजन में देश विदेश से यहां रिकार्ड संख्या में पर्यटक पहुंचे और हाथी, गुलदार, भालू, चीतल, हिरन और सांभर जैसे सैकड़ों वन्यजीवों का दीदार किया। पिछले वर्ष 10840 पर्यटक जंगल सफारी करने के लिए यहां पहुंचे थे। जिससे वन विभाग को 31,19,525 रूपए राजस्व प्राप्त हुआ था। इस बार 16,717 पर्यटक जंगल सफारी करने पहुंचे और राजस्व बढ़कर 53,01,200 रूपये पर पहुंच गया। फिलहाल मानसून सीजन के चलते झिलमिल झील के गेट बंद कर किए गए हैं और अक्टूबर में फिर से खोले जाएंगे। इसके बाद पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी।
हरिद्वार वन प्रभाग के अंतर्गत स्थित झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व को वर्ष 2005 में भारत के पहले संरक्षण रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया था। अपनी अद्वितीय जैव-विविधता, प्राकृतिक सौन्दर्य तथा सुव्यवस्थित सफारी संचालन के कारण झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। स्थापना के बाद से ही यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या और राजस्व लगातार बढ़ रहा है। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा एवं सतत् पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण है।
यहां आने वाले पर्यटकों को प्राकृतिक वनों, घास के मैदानों, नदी तटों एवं आर्द्रभूमियों की अनूठी पारिस्थितिकी का अनुभव करते हुए वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का अवसर मिलता हैं। सफारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि संरक्षण एवं पर्यटन के मध्य संतुलन स्थापित करते हुए झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व को देश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में विकसित किया जाए। इस बार भी मानसून सीजन के कारण जंगल सफारी बंद कर दी गई है। मानसून सीजन वन्यजीवों का प्रजनन काल होता है। मानसून के बाद सफारी ट्रैक की मरम्मत कराई जाएगी और अक्टूबर माह में फिर से जंगल सफारी शुरू की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला
