भंडारे वाले बाबा रमाशंकर को पुलिस ने दी अंतिम विदाई
हरिद्वार, 12 जुलाई (हि.स.) ।इंटरनेट की दुनिया में भंडारे वाले बाबा के नाम से चर्चित और सादगी व अनोखे अंदाज से लाखों दिलों को जीतने वाले रमाशंकर गुप्ता का रहस्यमय निधन हो गया। गुरुवार को उनका शव हर की पैड़ी के सार्वजनिक टॉयलेट से बरामद हुआ था। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है लेकिन दुर्भाग्य जनक पहलू यह है कि आर्थिक तंगी के चलते रमाशंकर गुप्ता के परिजन हरिद्वार नहीं आ सके। ऐसे में हरिद्वार पुलिस ने इंसानियत की मिसाल कायम करते हुए रमाशंकर गुप्ता को सम्मानजनक अंतिम विदाई दी।
हरिद्वार की गलियों में हाथ जोड़कर श्रद्धालु राहगीरों से 'भंडारा करा दो बाबू जी' कहने वाले रमाशंकर गुप्ता की मृत्यु बेहद रहस्यमयी और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। गुरुवार को उनका शव हर की पौड़ी' के एक पब्लिक टॉयलेट में मिला पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक व्यक्ति का शव मिलने पर कोतवाली नगर पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की। जांच में मृतक की पहचान रमाशंकर गुप्ता (58 वर्ष), निवासी हरदोई, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई, जो विगत अनेक वर्षों से हर की पौड़ी क्षेत्र में श्रद्धालुओं के सहयोग से सूक्ष्म भंडारे आयोजित कराने के लिए जाने जाते थे।
हरिद्वार के पुलिस कप्तान नवनीत सिंह के अनुसार परिजनों से संपर्क कर उन्हें हादसे की सूचना दी गई और 72 घंटे तक उनका इंतजार भी किया गया। ज्ञात हुआ कि आर्थिक तंगी के कारण वे हरिद्वार नहीं आ सकते। ऐसे में रविवार को पोस्टमार्टम के उपरांत कोतवाली नगर पुलिस ने खड़खड़ी श्मशान घाट में हिंदू रीति-रिवाज से उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया।
रमाशंकर गुप्ता की सोशल मीडिया पर भंडारे वाले बाबा के रूप में खासी पहचान थी। अब उनके सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। उनके बोलने का अंदाज बेहद खास था। जब वे हर की पैड़ी और उसके आसपास हरिद्वार आए श्रद्धालुओ के सामने हाथ जोड़कर खड़े होते और बड़े ही प्यार से बाबूजी शब्द जोड़कर भंडारा कराने की अपील करते। वह कहते मात्र 200 में 11 बाबाओं को भरपेट भोजन कराया जा सकता है और अगर इतना संभव नहीं है तो ₹ 100 में 5 साधुओं को भोजन करवा दो। उनकी एक बड़ी खूबी आदमी को पहचानने का गुण था। इसी के चलते वह जिस श्रद्धालु से भंडारे की अपील करते, उन्हें वह निराश नहीं करता था।
उनकी मृत्यु पर एक यूजर ने लिखा हरिद्वार में गरीबों और जरूरतमंदों की रोटी के लिए हाथ जोड़कर सामने वाले से बाबूजी भंडारा करा दो कहने वाले इस शख्स को इंटरनेट हमेशा याद रखेगा। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
बताते हैं कि वह 20- 25 वर्ष पहले हरदोई से हरिद्वार आ गए थे और विगत अनेक वर्षोँ से यहां श्रद्धालुओं से गरीब बाबाओं व साधुओं के लिए भंडारे की अपील किया करते थे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला
